चीनी की कीमतों में उछाल के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के इम्पोर्ट के नियम बदले
चीनी के बढ़ते दामों के बीच केंद्र ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के TRQ आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब आयातित कच्ची चीनी को हर खेप के लिए तय समयसीमा में रिफाइंड कर घरेलू बाजार में बेचना होगा।
नई दिल्लीः देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के TRQ (टैरिफ रेट कोटा) आयात के लिए बिक्री की समयसीमा में बदलाव किया है। अब आयातकों को पहले से तय किसी एक अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि हर खेप के लिए अलग समयसीमा लागू होगी।
क्या है सरकार का नया नियम?
सरकारी आदेश के अनुसार, TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर रिफाइंड करके सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचाना होगा।
पहले आयातित कच्ची चीनी को बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम तारीख निर्धारित थी। नए नियम में इस व्यवस्था को बदलते हुए हर खेप के लिए अलग-अलग दो महीने की समयसीमा तय की गई है।
एक महीने में 7.52 रुपये किलो महंगी हुई चीनी
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को चीनी की खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक इसकी कीमत बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
इस तरह एक महीने में चीनी की कीमत में 7.52 रुपये प्रति किलो, यानी करीब 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में इस तेज उछाल का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
भारत में कितना है चीनी का स्टॉक?
चीनी की बढ़ती कीमतों और उत्पादन में कमी को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चिंता जताई है। उनके मुताबिक, गन्ने की फसल पर अल नीनो की परिस्थितियों का असर पड़ा है। इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कृषि उत्पादन, खासकर चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ा है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है, जबकि देश के पास 20-25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है।
क्यों अहम है सरकार का यह फैसला?
चीनी की खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच आयातित कच्ची चीनी को जल्दी रिफाइंड कर घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने की व्यवस्था का मकसद बाजार में आपूर्ति बनाए रखना है। हर खेप के लिए दो महीने की समयसीमा तय होने से आयातित कच्ची चीनी को लंबे समय तक रोककर रखने की गुंजाइश कम होगी।
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