बांके बिहारी मंगला आरती : साल में सिर्फ एक बार ही क्यो होती है विशेष मंगला आरती, आधी रात है पूजा का विधान 

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Edited By Anjali Singh
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बांके बिहारी मंदिर में साल में सिर्फ एक बार होने वाली विशेष मंगला आरती संपन्न हुई। बड़ी संख्या में भक्तों ने ठाकुर बांके बिहारी के दिव्य दर्शन किए।

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के महापर्व पर वृंदावन स्थित विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शनिवार तड़के वह अलौकिक क्षण आया, जिसका इंतजार देश-दुनिया के भक्तों को पूरे साल रहता है। मंदिर में वर्ष में केवल एक बार होने वाली बांके बिहारी जी की प्रसिद्ध मंगला आरती पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। 

धूमधाम से मना श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में उनका जन्मोत्सव धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि शुक्रवार आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, करताल, मृदंग और 'हरिबोल' के जयघोष से गूंज उठा। भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हुए श्रद्धालु नृत्य करने लगे। 

उन्होंने बताया कि रात 12 बजकर 10 मिनट तक महाआरती हुई। केसर और अन्य सुगंधित पदार्थों से अभिषिक्त श्रीकृष्ण की चल प्रतिमा को चांदी के सूप में विराजमान कर अभिषेक स्थल पर लाया गया। ठाकुर जी का पहला अभिषेक कामधेनु गाय के थन से किया गया। यह गाय चांदी से निर्मित है, जिस पर सोने की परत तथा 33 कोटि देवताओं के चित्र अंकित हैं। 

क्यों खास है मंगला आरती

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की यह परंपरा बेहद अनोखी है। आम दिनों में यहाँ केवल श्रृंगार और राजभोग आरती ही की जाती है, मंगला आरती नहीं होती। मान्यता है कि ठाकुर जी बाल स्वरूप में हैं और वे रात्रि में रासलीला रचाने के बाद विश्राम करते हैं, इसलिए उन्हें सुबह जल्दी नहीं जगाया जाता। 

हालांकि, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को कान्हा के प्राकट्य के बाद तड़के यह विशेष मंगला आरती उतारी जाती है। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान के जन्मोत्सव के बाद सेवायत गोस्वामियों द्वारा ठाकुर जी का गोपनीय महाअभिषेक किया गया। 

क्या होता है गोपनीय महाअभिषेक 

दूध, दही, देसी घी, शहद और शर्करा (पंचामृत) के साथ-साथ दुर्लभ औषधियों से बांके बिहारी का स्नान कराया गया। श्री राम जन्मभूमि और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से आए सुनहरी पीतांबरी पोशाक, केसरिया वस्त्र और हीरे-माणिक्य जड़े आभूषणों से सजाया गया। भोर के समय जैसे ही मंदिर के पट खुले और मंगला आरती शुरू हुई, पूरा प्रांगण शंखनाद, घड़ियाल की टंकार और मंजीरों की गूंज से सराबोर हो उठा। 

जन्म होते ही नाचने-गाने लगते है लोग 

पहले श्रीगणेश और नवग्रहों की पूजा की गई। मंदिर प्रशासन ने जन्मोत्सव के लिए महाकाल की नगरी उज्जैन से पखावज और मृदंग वादकों को भी आमंत्रित किया था। रात 12 बजकर 45 मिनट पर शृंगार आरती की गई। लाखों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने 'बांके बिहारी लाल की जय' और 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के गगनभेदी जयकारे लगाए। बांके बिहारी की एक झलक पाते ही श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगते है लोग। 

भीड़ को देखते हुए प्रशासन रहता है मुश्तैद 

मंगला आरती के दौरान उमड़ने वाली अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर वन-वे सिस्टम लागू किया गया और सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह होल्डिंग एरिया बनाए गए थे। आरती संपन्न होने के साथ ही अब समूचे ब्रज क्षेत्र में नंदोत्सव की धूम शुरू हो गई है।

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