हल्द्वानी: अखबार बेचने वाले का अनोखा अंदाज देख जर्मनी की कंपनी ने उन पर बना दी डॉक्यूमेंट्री
हल्द्वानी, अमृत विचार। कहते हैं कि एक अखबार बनाना जितना मुश्किल होता है, उतना ही मुश्किल उसे बेचना होता है। लेकिन एक ऐसे कर्मयोद्धा भी हैं जिन्होंने हेड लाइन को अपने अंदाज में बयां कर न केवल अखबार बेचा बल्कि सफलता की एक नई इबारत गढ़ी। हम बात कर रहे हैं बद्रीपुरा के पांडेय निवास …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कहते हैं कि एक अखबार बनाना जितना मुश्किल होता है, उतना ही मुश्किल उसे बेचना होता है। लेकिन एक ऐसे कर्मयोद्धा भी हैं जिन्होंने हेड लाइन को अपने अंदाज में बयां कर न केवल अखबार बेचा बल्कि सफलता की एक नई इबारत गढ़ी। हम बात कर रहे हैं बद्रीपुरा के पांडेय निवास गली में रहने वाले 58 वर्षीय कर्म योद्धा कैलाश रौतेला की। जिन्होंने खबरों की अपनी हेड लाइन बनाई, बोली और चुटकी में अखबार बेच दिया। उनकी इस खूबी से जर्मनी की एक कंपनी ने उन पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई।
कैलाश रौतेला मूल रुप से अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट के रहने वाले हैं। वह यहां पिछले 58 सालों से बद्रीपुरा में पांडेय निवास वाली गली में रहते हैं। उनकी पत्नी लीला रौतेला का निधन हो चुका है। जबकि एक बेटा विनय रौतेला बिजली विभाग में वरिष्ठ लिपिक है और दूसरा बेटा अतुल रौतेला जिम ट्रेनर हैं। उन्होंने अखबार बेच कर मिलने वाली कमाई से दोनों को पढ़ालिखा कर काबिल बना दिया। वह बताते हैं कि पिछले 40 सालों से वह अखबार बेच रहे हैं। वह केमू बस अड्डे से रोडवेज तक महज 300 कदमों की इस दूरी में तीन-चार घंटों में बसों में सफर करने वाले यात्रियों को अखबार बेचते आ रहे हैं। उस समय वह रोजाना तीन-चार सौ रुपये रोज के कमाते थे जो अब बढ़ गए हैं। कैलाश कहते हैं कि ‘मायावती को है तलाकशुदा आदमी की तलाश’ ‘वर्दी में गुंडागर्दी’ जैसी चुटीली हेड लाइन बनाकर अखबार बेचा करते थे।
वह बताते हैं कि पहले अखबार बेचना आसान था, सवारियों को बताते थे अखबार की खबरें पढ़ कर टाइमपास करो, गर्मी लगे तो पंखा बना हवा करो, ओढ़ो बिछाओ हर जगह अखबार काम आता है। उनका कहना है कि अब आदमी मोबाइल में लगा रहता है। कोरोना महामारी का भी असर पड़ा लेकिन सही और सटीक खबर अखबार से ही मिलती है इसलिए कुछ चुनौतियों का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन अखबार की बिक्री फिर से रफ्तार पकड़ने लगी। अब भी वह तीन-चार घंटे में ही किसी एक युवा के बराबर की कमाई कर लेते हैं।
जब आईएएस सूर्य प्रताप सिंह को उन्हीं के तबादले की खबर बता कर बेचा अखबार
कैलाश रौतेला बताते हैं कि नैनीताल के तत्कालीन डीएम सूर्य प्रताप सिंह का तबादला हुआ था। तबादले के ठीक अगली सुबह वह किसी काम से रोडवेज पहुंचे हुए थे तो वह ईमानदार अफसर का तबादला, भ्रष्टाचारियों को बचाने में जुटी सरकार चिल्ला कर अखबार बेच रहे थे। यह सुनकर आईएएस सिंह ने उन्हें बुलाया तो कैलाश ने सिंह को यही लाइन फिर से दोहराई और उन्हें अखबार बेच दिया। हालांकि बाद में उन्हें पता चला कि यह वहीं डीएम हैं जिनके तबादले की खबर चिल्ला कर वह अखबार बेच रहे थे।
कर्मयोद्धा कैलाश रौतेला के कुछ मशहूर वाक्य, जिनके सहारे बेचते थे अखबार
= मायावती को तलाकशुदा आदमी की तलाश
= प्रियंका गांधी का दिल किसानों पर आया
= मुलायम ने चलवाई गोलियां, सैकड़ों कारसेवक मारे गए
= अल्मोड़ा की 30 प्रतिशत लड़कियों को बनाया जाएगा लड़का
= पाकिस्तान को बूट के नीचे रखने वाला जमीन आसमान के बीच में मारा गया
= बोफोर्स घोटाले का पर्दाफाश, फंस गए राजीव गांधी
