मिठास की नर्सरी से महिलाएं घरों में ला रहीं खुशहाली

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महिपाल गंगवार, बरेली। मिशन शक्ति अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जिले की कुछ महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार करके न सिर्फ अपनी तरक्की का रास्ता खोला बल्कि दूसरों की थाली की मिठास भी बढ़ाई है। 25 महिला समूहों …

महिपाल गंगवार, बरेली। मिशन शक्ति अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जिले की कुछ महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार करके न सिर्फ अपनी तरक्की का रास्ता खोला बल्कि दूसरों की थाली की मिठास भी बढ़ाई है। 25 महिला समूहों से जुड़ीं 260 महिलाएं गन्ना विभाग के सहयोग से नर्सरी तैयार कर रही हैं। इससे किसानों के साथ महिलाएं भी कमाई कर रही हैं। इसे लेकर गन्ना विभाग ब्लॉक स्तर कार्यशालाएं भी आयोजित कर रहा है।

जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि महिला सशक्तिकरण के लिए प्रभावी कदम उठाने को लेकर मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 260 महिला किसानों को सिंगल बड एवं चिप विधि से गन्ने की पौध तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया था। इसके पीछे मकसद था कि गांव की हर महिला आत्मनिर्भर बने और उन्हें कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

डीसीओ के मुताबिक, महिलाओं की मेहनत रंग लाई है। 4,36,000 सीडलिंग तैयार कर किसानों को बेचा गया है। इससे इन महिला किसानों को 6,55,000 रुपये की आय हुई है। यह धनराशि अगले वर्ष लगभग डेढ़ गुना और उसके अगले वर्ष करीब ढाई गुना होने का अनुमान है।

वहीं, इस अभियान के ग्रामीण क्षेत्रों की अधिक से अधिक महिला किसानों को जोड़ने के लिए प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर. भुसरेड्डी ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति अभियान से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

गन्ना अधिकारी के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के अंतर्गत गन्ना विकास परिषदों में ग्रामीण महिलाओं को गन्ने की खेती में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।

एक पौध पर करीब तीन रुपये आती है लागत
गन्ना विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एक पौध पर करीब तीन रुपये की लागत आती है जिसमें डेढ़ रुपये का अनुदान मिलता है। अब तक किसान तीन आंख वाले गन्ने के टुकड़े को बीज के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन इस विधि से बीज ज्यादा लगता है और पैदावार भी कम होती है। समूह में एक आंख वाले पौधे का इस्तेमाल किया जा रहा है। महिलाओं को गन्ने का बीज विभाग मुहैया करा रहा है।

छत पर तो कहीं आंगन में तैयार हो रही पौध
गन्ने की गांठों को कोकोपिट (मिट्टी भरी पॉलिथीन) में पौध डालकर तैयार किया जाता है। एक महिला रोजाना आसानी से 150 से 200 सीडलिंग तैयार कर 300 से 400 रुपये प्रतिदिन आसानी से कमा सकती है। विभाग की तरफ से इसके लिए महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा है।

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