बरेली: फर्जी पंजीकरण पर लाखों की धान खरीद, अभी कई परतें खुलेंगी
अमृत विचार, बरेली/नवाबगंज। वैसे तो पूरी धान खरीद कई बार सवालों के घेरे में रही मगर अब नौगवां भगवंतपुर में 85 बिना जमीन वाले किसानों के पंजीकरण पर हुई मोटी खरीद ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पहले सत्यापन में ग्रामीणों को बिना जमीन के ही किसान बना दिया। उसके बाद धान खरीद के …
अमृत विचार, बरेली/नवाबगंज। वैसे तो पूरी धान खरीद कई बार सवालों के घेरे में रही मगर अब नौगवां भगवंतपुर में 85 बिना जमीन वाले किसानों के पंजीकरण पर हुई मोटी खरीद ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पहले सत्यापन में ग्रामीणों को बिना जमीन के ही किसान बना दिया। उसके बाद धान खरीद के भुगतान को लेकर पर्दा डाला हुआ है। अगर आसानी से सत्यापन की प्रक्रिया पास कर पंजीकरण करा भी लिया गया तो धान खरीद का भुगतान किन खातों में पहुंचा, इस पर अधिकारी कोई जांच नहीं कर सके हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण में क्षेत्र के एक राइस मिलर का अफसरों से साठगांठ का खेल चर्चाओं में है। फिलहाल जांच के बाद ही कई और राज खुलने के आसार हैं।
शासन व जिला प्रशासन भले ही धान खरीद में पारदर्शिता का दावा करता रहा, लेकिन बीते तीन साल से दलाल, बिचौलियों से ही धान की खरीदकर लक्ष्य पूरा किया गया। धान खरीद की घपलेबाजी में माफिया का पूरा सिस्टम रहता है। ऐसा नहीं इसमें सिर्फ राइस मिलर ही शामिल रहे। सभी ने मिलकर धान खरीद शुरू होने से पहले ही घपलेबाजी का खाका तैयार कर लिया था। बाकायदा सुविधा शुल्क का प्रति क्विंटल निर्धारण था। क्रय केंद्रों के ठेकों से लेकर खरीद, चावल उतार में डाला वसूली सुविधा शुल्क की रकम निर्धारित रहती है।
खाद्यान्न से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस बार भी धान खरीद पर तीस रुपये प्रति क्विंटल और चावल उतार में डाला वसूली को बीस हजार रुपये लाट (270 क्विंटल चावल) सुविधा शुल्क निर्धारित था। इसमें सिस्टम की भी पूरी मिलीभगत रही। नवाबगंज के नौगवां भगवंतुपर में भी इसी तरह का खेल माफिया और अफसरों के गठजोड़ से हुआ। 85 बिना जमीन वाले ग्रामीणों को किसान बनाकर उनके नाम का पंजीकरण करा दिया गया। इस दौरान सत्यापन में खेल किया गया। बड़ी लापरवाही संबंधित क्षेत्र के अफसरों की भी रही क्योंकि उनके सत्यापन के आधार पर बिचौलियों का धान केंद्रों पर खरीद लिया गया।
पड़ोसी जनपद में पकड़ा था इसी तरह का मामला
बीते दिनों पड़ोसी जिला पीलीभीत में इसी तरह का मामला सामने आया था। बरखेड़ा ब्लॉक के एक राइस मिलर ने अपने यहां काम करने वाले मजदूरों को किसान दर्शाकर उनके नाम पर पंजीकरण करा दिया था। उनके बैंक खाते भी खुलवा दिए गए। उनके बैंक की पासबुक व अन्य दस्तावेज अपने पास रख लिए थे। उनसे कहा गया था सेलेरी कैश में दे दी जाएगी।
इस प्रकरण की शिकायत स्थानीय ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री से की। प्रकरण की जांच कराई गई तो मामला सही मिला। राइस मिल मालिक ने किसानों से धान तय कीमत से बहुत सस्ते में खरीदने के बाद महंगे दामों में बेचने की बात कबूल की थी। कुछ इसी तरह का खेल यहां भी होना बताया गया है। सूत्रों की मानें तो राइस मिलर ने मिलीभगत से करोड़ों का खेल कर दिया। इसमें कुछ प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है।
एसडीएम की तय की गई जिम्मेदारी फिर भी हो गया खेल
माफियागिरी धान खरीद में हावी न हो सके और किसान को क्रय केंद्र पर बेवजह परेशान न किया जाए। इसके लिए डीएम ने अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की थी। इसमें सभी एसडीएम को अपने क्षेत्र के क्रय केंद्रों का संयुक्त रुप से निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। उनके यह भी कहा गया था धान खरीद को लेकर वह व्यवस्थाएं चेक करते रहे और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई करें। साथ ही किसानों को जागरूक भी कराते रहे। लेकिन यहा तो पूरी व्यवस्था को सेंध लगाने का काम कर अफसर सिर्फ कमाई में डटे रहे।
केंद्र प्रभारियों को अपना तर्क, पंजीकरण के आधार पर की खरीद
नवाबगंज की जिन एजेंसियों के केंद्रों पर फर्जी खरीद होना पाया गया है। उसमें खासबायत यह है केंद्र प्रभारियों ने तो पंजीकरण के आधार पर ही धान की खरीद की, लेकिन सत्यापन करने वाले अफसरों ने किस आधार पर धान तौल होने दीं यह बड़ा सवाल खड़ा है। शिकायतकर्ता भी इसमें राइस मिलर और अफसरों की साठगाठ से खेल होना बता रहे हैं। इधर, कुछ केंद्र जहां बड़ी मात्रा में धान बिक्री किया गया वहां के केंद्र प्रभारी भी लपेटे हैं। हालाकि इनका अपना तर्क है मंडियों में धान तौल के वक्त एसडीएम की जिम्मेदारी तय की गई थी। उनके द्वारा भेजा गया धान पंजीकरण के आधार पर तौला गया है।
खातों की जांच से खुलेगा राज
धान खरीद में अभी कई ओर राज खुलेंगे। अफसर भले ही जांच पूरी नहीं होने की बात कहकर अपना बचाव कर रहे हैं, लेकिन जिन 85 लोगों के नाम पर धान खरीद की गई। उनका भुगतान किन खातों में गया इसकी जांच के बाद कई का फंसना तय है। राइस मिलर्स की भूमिका इसलिए भी संदिग्ध बनी हुई क्योंकि दो मिलों पर धान खरीद में फर्जीवाड़ा पकड़ा जा चुका है।
