बरेली: बोली इंस्पेक्टर की मां..बेटा नहीं मेरी ‘जान’ चली गई
अमृत विचार, बरेली। रामपुर तैनात इंस्पेक्टर विनोद कुमार आनंद की मौत के बाद उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। इंस्पेक्टर की पत्नी व मां का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की मां सुशीला आनंद बेटे को याद करके रो पड़ती और कहती कि ईश्वर तूने मेरा बेटा नहीं मेरी जिंदगी छीन ली है। अब …
अमृत विचार, बरेली। रामपुर तैनात इंस्पेक्टर विनोद कुमार आनंद की मौत के बाद उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। इंस्पेक्टर की पत्नी व मां का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की मां सुशीला आनंद बेटे को याद करके रो पड़ती और कहती कि ईश्वर तूने मेरा बेटा नहीं मेरी जिंदगी छीन ली है। अब मुझे और क्या-क्या दुख देखने पड़ेंगे। मुझे भी मार दो। वहीं पत्नी सुधा आनंद के मुंह से कुछ शब्द ही नहीं निकल रहे था। वह बार-बार पति को याद करके बिलख पड़ती और बेटे को देखकर उससे कहती कि अब तेरी देखभाल कौन करेगा। वहीं इंस्पेक्टर के बेटा भी गुमसुम था, उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हुआ है।
रामपुर हुए हादसे के बाद परिजनों ने घायल इंस्पेक्टर विनोद कुमार को परिजनों ने प्रभा टॉकीज के पास स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां इलाज के दौरान उनकी मौत बुधवार को हो गई थी। इंस्पेक्टर की मौत की खबर लगते ही परिजन व परिचित अस्पताल पहुंच गए।
इंस्पेक्टर की मां सुशीला देवी ने जैसे ही बेटे का शव देखा वह बिलख पड़ी, रो रोकर शव को उठाने का प्रयास करतीं, कहतीं बेटा एक बार उठ जा मेरे लाल, मां का रुदन सुनकर हर किसी के आंसू निकल पड़े वहीं पत्नी सुधा आनंद पति के शव को देखकर बिलख पड़ी बोली मेरे साथ ईश्वर ने यह क्या कर दिया। भगवान ने मेरी पूरी दुनिया उजाड़ दी। वहीं डॉक्टर पर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। कहा डॉक्टर चाहते तो उनके पति बच सकते थे।

ब्लड लेने गए तब तक कर दिया आपरेशन
इंस्पेक्टर विनोद कुमार आनंद के मित्र उत्तम सिंह पटेल, पंकज यादव और मनोज शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों ने तीन यूनिट ब्लड मांगा था। बताया कि वे लोग ब्लड देने के लिए ब्लड बैंक गए थे। तब तक डॉक्टर ने पेट का आपरेशन कर दिया। उन्होंने बताया कि खून की कमी थी तो इतनी जल्दी क्या थी जो पेट का आपरेशन बिना खून के कर दिया। यही वजह रही कि इंस्पेक्टर की मौत हो गई। विनोद के मित्रों ने बताया कि यदि डॉक्टर आधा घंटे और इंतजार कर लेते तो उनका दोस्त बच सकता था।
मौत की खबर सुनते ही आक्रोशित हुए लोग
मनोज शर्मा ने बताया कि विनोद की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर है। उन्होंने आरोप लगाया कि चोट चेहरे पर लगी थी, तो डॉक्टरों ने पेट का आपरेशन क्यों कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने पेट में क्या दिक्क्त थी, सात दिन में डॉक्टर ने एक बार भी परिजनों को नहीं बताया। आरोप है कि डॉक्टर रुपये बनाने के चक्कर में लापरवाही बरतते रहे, जिससे इंस्पेक्टर की मौत हो गई।
परिवार में अकेले थे विनोद
इंस्पेक्टर के मित्र मनोज ने बताया कि उनके पिता भी नहीं है, छोटे भाई की मौत करीब सात वर्ष पहले हो चुकी है। परिवार में इंस्पेक्टर विनोद कुमार ही थे, जो पूरे परिवार की देखभाल करते थे। उन्होंने बताया कि उनका पैतृक गांव कन्नौज जिले में है। पवन बिहार में उन्होंने मकान ले लिया है। रामपुर में तैनाती के बाद वह रामपुर में रहते थे, जबकि परिवार बरेली में रहता था।
