स्त्री और पुरुष दोनों ने ही, जग की सब रीत निभाई है..
स्त्री और पुरुष दोनों ने ही जग की सब रीत निभाई है अपने अपने कर्म क्षेत्र में दोनों ने ही सफलता पाई है स्त्री – बेटी , बहन पत्नी, मां बनकर अपने फर्ज निभाती है पुरुष- बेटा ,भाई ,पिता बनकर अपना फर्ज निभाते हैं आये कितनी भी मुश्किल कभी ना ये घबराते हैं धैर्य धारण …
स्त्री और पुरुष दोनों ने ही
जग की सब रीत निभाई है
अपने अपने कर्म क्षेत्र में
दोनों ने ही सफलता पाई है
स्त्री – बेटी , बहन पत्नी, मां बनकर
अपने फर्ज निभाती है
पुरुष- बेटा ,भाई ,पिता बनकर
अपना फर्ज निभाते हैं
आये कितनी भी मुश्किल
कभी ना ये घबराते हैं
धैर्य धारण करें ये, अपनी भावनाएं छिपाये रखते हैं
दिल ही दिल में यह भी तो
टूट कर बिखर जाते हैं
मानव संवेदनाएं तो दोनों में ही होती हैं
अपना दर्द पिता दिखा ना पाए
मां आंखें भर रो लेती हैं
पर इस जग में कुछ लोगों के कारण ही
पुरुष जाति ने बदनामी पाई है
जिन्होंने नारी को अबला समझ
जुर्म उस पर ढाए हैं
पर वो पुरुष भी तो हैं जग में
जो नारी को पूरा सम्मान देते हैं
मां, बेटी ,बहन, पत्नी सब पर प्यार लुटाते हैं
करके की इच्छा पूरी ये
जीवन भर पर जाते हैं
इनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए
खुद को ही भूल जाते हैं
बस कमी ये रह जाती है
ये अपना दर्द दिखा नहीं पाते हैं।
दीपा कर्नाटक, निवासी- मुक्तेश्वर

