बरेली: विकास भवन के कई अफसर और कर्मचारी बीमार, मची खलबली

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बरेली, अमृत विचार। विकास भवन में पंचायत चुनाव में लगे कर्मचारियों की ड्यूटी काटने की जिम्मेदारी संभाले अफसर समेत कई कर्मचारी बीमार हैं। उन्होंने कार्यालय आना बंद कर दिया है। पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए लगभग 19 हजार कार्मिकों की जरूरत है। इनकी तैनाती के लिए लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। इस …

बरेली, अमृत विचार। विकास भवन में पंचायत चुनाव में लगे कर्मचारियों की ड्यूटी काटने की जिम्मेदारी संभाले अफसर समेत कई कर्मचारी बीमार हैं। उन्होंने कार्यालय आना बंद कर दिया है। पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए लगभग 19 हजार कार्मिकों की जरूरत है। इनकी तैनाती के लिए लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। इस बार सभी विभागों से कर्मचारियों का डाटा ऑनलाइन फीड कराया गया था। 15 अप्रैल को जिले में मतदान होने के कारण सभी कार्मिकों को ड्यूटी पत्र जारी कर दिए गए हैं।

बीते सप्ताह विकास भवन स्थित सभागार में डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा समेत कुछ अन्य अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी काटने की जिम्मेदारी मिली थी। तीन दिन ड्यूटी कटवाने का सिलसिला जारी रहा। भीड़ इस कदर थी कि लोग कोरोना से बेखौफ थे। माना जा रहा है कि ड्यूटी कटवाने पहुंचने वालों में कुछ कोरोना संक्रमित भी होंगे जिनकी वजह से हालात बिगड़ गए।

डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा कार्य के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए कई दिनों से बीमार होने के बाद भी कार्यालय में डटे रहे। शनिवार को ड्यूटी कटवाने का अंतिम था। कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की तबीयत तीन दिन पहले से खराब थी लेकिन रविवार को अचानक डीसी मनरेगा के यहां तैनात कई कर्मचरियों की हालत बिगड़ गई। मंगलवार को भी तमाम कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंचे। इधर मंडलीय लोकपाल की कोरोना से मौत के बाद विकास भवन कर्मचारी दहशत में हैं।

ड्यूटी कटवाने जा पहुंचा कोरोना पॉजिटिव
विकास भवन में सोमवार को तब हड़कंप मच गया, जब कोरोना पॉजिटिव ड्यूटी कटवाने सीडीओ के स्टेनो कार्यालय पहुंच गया। इस पर किसी ठोस कारण के ड्यूटी काटने से स्टेनो ने इन्कार किया तो कर्मचारी ने खुद को कोरोना पॉजिटिव होने की बात कह दी। उसने परिवार के अन्य सदस्यों के भी बीमार होने की बात बताई। आनन-फानन में इसकी जानकारी आला-अफसरों को देकर आगे कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें लौटा दिया।

अब भी नहीं जागे तो हालात होंगे बदतर
मंडलीय लोकपाल मनरेगा की कोरोना से मौत के बाद भी अफसर गंभीर नहीं हैं। विकास भवन में न कोई कार्यालय सील किया और न परिसर को सेनेटाइज कराया। यहां तक कि विकास भवन में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष इंतजाम तक नहीं किए गए जिससे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।

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