बरेली: करोड़ों के काम बगैर टेंडर के, जांच रिपोर्ट दबाने की तैयारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के मुख्य अभियंता त्रिलोकी नाथ ने करोड़ों रुपये के कामों को कराने के लिए टेंडर देने में हुई मनमानी सहित कई घोटालों का पर्दाफाश किया। शासन तक शिकायत भेजीं। इससे उथल-पुथल भी मची है। शासन ने मामलों का संज्ञान लेते हुए जांच कराने के आदेश दिए तो मंडलायुक्त …

बरेली, अमृत विचार। बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के मुख्य अभियंता त्रिलोकी नाथ ने करोड़ों रुपये के कामों को कराने के लिए टेंडर देने में हुई मनमानी सहित कई घोटालों का पर्दाफाश किया। शासन तक शिकायत भेजीं। इससे उथल-पुथल भी मची है। शासन ने मामलों का संज्ञान लेते हुए जांच कराने के आदेश दिए तो मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार ने इसकी जांच बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह को सौंपी, लेकिन सूत्रों की मानें तो इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारी कई दिनों के बाद भी इस मामले में कुछ भी स्पष्ट बोलने से कतरा रहे हैं। यही वजह से है कि इस प्रकरण में कार्रवाई तो दूर जांच तक फाइनल नहीं की जा रही है। विभाग में तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

बीडीए ने हाल में रामगंगा नगर आवासीय परियोजना में करोड़ों रुपये के कामों के टेंडर जारी किए थे। मुख्य अभियंता त्रिलोकीनाथ ने शासन में शिकायत भेजी थी कि रामगंगा नगर में बन रही 45 मीटर चौड़ी मास्टर रोड के डिवाइडर में स्ट्रीट लाइन लगवाने के लिए करीब 53.85 लाख रुपये के काम बगैर टेंडर के ही दे दिए थे। इसी आवासीय परियोजना के सलिल खंड में नौ दुकानों के निर्माण जो करीब 38.32 करोड़ रुपये से कराए गए हैं। उनका निर्माण कार्य भी मनमाने तरीके से बगैर टेंडर के करा दिया गया है।

मुख्य अभियंता ने यह शिकायत भी की है कि टेंडर सिर्फ एक या दो प्रतिशत कम रेट पर दे दिए गए हैं, जबकि दूसरी निर्माणदायी संस्थाओं के टेंडर आम तौर पर 10 प्रतिशत या उससे भी कम रेट पर दिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया था कि इससे भी बीडीए के अधिकारी व ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्य अभियंता ने इस मामलों का खुलासा करने के बाद से ही बीडीए में काफी हड़कंप मचा हुआ है। इ

स मामले में प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार की ओर से आदेश जारी होने के बाद बीडीए गुपचुप तरीके से इन सभी प्रकरणों की जांच करा रहा है लेकिन कोई अधिकारी इस पर कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इस प्रकरण को दबाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में इस मामले में दोषी अफसरों पर भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

बीडीए बोर्ड के सदस्यों को मंडलायुक्त से नहीं मिली जांच रिपोर्ट
बीडीए बोर्ड के सदस्य व पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना मम्मा के नेतृत्व में कई सदस्यों ने मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार से मिलकर बीडीए में बगैर टेंडर के दिए गए कार्यों सहित तमाम अनियमितताओं और गंभीर गड़बड़ी का मामला उठाया था। पार्षदों का यह शिष्टमंडल मंडलायुक्त से 31 मार्च को मिला था। छह दिन के अंदर जांच रिपोर्ट दिलाने का आग्रह किया था। जबकि बोर्ड के सदस्यों को अब तक यह जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। उनका कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है। इसलिए उच्चाधिकारियों को इसमें जांच कराने को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए। अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। इसलिए जल्द ही मंडलायुक्त से फिर से जांच रिपोर्ट मांगने के लिए संपर्क किया जाएगा।

“बीडीए में विकास कार्यों को लेकर हुई गड़बड़ी की शिकायत का मामला संज्ञान में है। इसे गंभीरता से देखा है।” -आर. रमेश कुमार, मंडलायुक्त/अध्यक्ष, बीडीए

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