बरेली: एक व्हीलचेयर के लिए दिव्यांग से चक्कर लगवा रही सरकारी मशीनरी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। जब सरकारी सिस्टम ही लाचार हो जाए तो फिर दिव्यांग को सहारा कौन देगा। एक दिव्यांग लंबे समय से एक व्हीलचेयर के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रहा है। व्यवस्था से जुड़े लोगों में दोनों पैरों से चल-फिर पाने में अक्षम इस दिव्यांग को देखकर कोई मानवीय संवेदना नहीं जाग रही है। …

बरेली, अमृत विचार। जब सरकारी सिस्टम ही लाचार हो जाए तो फिर दिव्यांग को सहारा कौन देगा। एक दिव्यांग लंबे समय से एक व्हीलचेयर के लिए सरकारी दफ्तरों में भटक रहा है। व्यवस्था से जुड़े लोगों में दोनों पैरों से चल-फिर पाने में अक्षम इस दिव्यांग को देखकर कोई मानवीय संवेदना नहीं जाग रही है।

किसी तरह से घिसटता हुआ यह दिव्यांग शुक्रवार को नगर निगम पहुंचा और वहां बैठे एक अधिकारी से गुजारिश की कि उसे व्हीलचेयर दिलाने में मदद कर दें लेकिन उन्होंने उसे विकास भवन जाने की हिदायत देते हुए भेज दिया। यह दिव्यांग एक बार फिर मायूस होकर वापस घर चला गया।

बिहारीपुर के रहने वाले आनंद के दोनों पैर खराब हैं। वह कोई काम नहीं कर सकते हैं। मां दूसरे के घरों में खाना बनाकर अपने घर का चूल्हा जलाती हैं। पैर खराब होने की वजह से एक-एक कदम चलने को तरस रहा आनंद कई साल से एक व्हीलचेयर को पाने के लिए मजबूरी की दौड़ लगा रहा है। वह शुक्रवार को किसी तरह से नगर निगम पहुंचा। गुरुवार को पंचायत चुनाव के बाद शुक्रवार को नगर निगम में सन्नाटा था।

वहां एक अधिकारी की गाड़ी देखकर वह उनके कमरे में चला गया। उनसे दरख्वास्त की कि साहब..कई साल से एक व्हीलचेयर के लिए भटक रहा हूं। आठ-दस साल पहले एक व्हीलचेयर मिली थी। वह टूट चुकी है। नई मिली नहीं। इतने पैसे होते नहीं कि कहीं जाने के लिए टैंपो का किराया दे सकूं। इसलिए एक व्हीलचेयर दिला दो। उन अधिकारी ने उसे दो टूक में जवाब दिया कि भाई यहां व्हीलचेयर नहीं दी जाती, विकास भवन जाओ।

इसके बाद वह दिव्यांग मायूस होकर उन अधिकारी के कमरे के बाहर चला गया। दिव्यांग के घिसटते और चेहरे पर परेशानी देख, नगर निगम परिसर में खड़े कुछ लोगों ने उसकी दिक्कत सुनकर कहा कि अभी चुनाव हुए हैं। इसलिए साहब लोग एक-दो दिन आराम करेंगे। इसलिए इधर उधर भटकने के बजाय सोमवार को ही कहीं जाना। यह सुनकर दिव्यांग निराश होकर वहां से चला गया।

संबंधित समाचार