बरेली: न एयरलिफ्ट न बेहतर इलाज, अव्यवस्था ले गई पीसीएस की जान
बरेली, अमृत विचार। संक्रमण काल में सरकारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं। युवा ट्रेनी पीसीएस अधिकारी डा. प्रशांत कुमार संक्रमित होने के बाद कई दिनों तक निजी अस्पताल में मौत से लड़ते रहे। उन्हें बेहतर इलाज की जरूरत थी। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। प्रशांत कुमार की भांजी ने सोशल …
बरेली, अमृत विचार। संक्रमण काल में सरकारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं। युवा ट्रेनी पीसीएस अधिकारी डा. प्रशांत कुमार संक्रमित होने के बाद कई दिनों तक निजी अस्पताल में मौत से लड़ते रहे। उन्हें बेहतर इलाज की जरूरत थी। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। प्रशांत कुमार की भांजी ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से बरेली से दिल्ली के लिए एयर लिफ्ट कराने की मांग की लेकिन इस ओर किसी स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया।
दो दिन पहले परिजनों ने किसी तरह दो कंपनियों से बात की लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया। ऐसे में प्रशांत की हालत लगातार बिगड़ती गई। निजी मेडिकल कॉलेज में दो दिन पहले उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी लेकिन उनके फेफड़ों में संक्रमण फैल गया था। उन्हें बेहतर इलाज की जरूरत थी जो समय पर नहीं मिला और सोमवार को एयर लिफ्ट के दौरान दिल्ली पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। युवा पीसीएस की मौत ने व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशांत करीब 10 दिनों से कोरोना से जंग लड़ रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीसीएस प्रशांत की मौत पर शोक जताया है। प्रशांत के परिजनों ने बताया कि वह गाजियाबाद जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्नी शैली, 1 साल का बेटा अथर्व, पिता धर्मवीर, मां व भाई हैं। प्रशांत के पिता जिला जज से सेवानिवृत्त हैं। उनके भाई सेल्स टेक्स ऑफिसर हैं।
प्रशांत की तीन साल पहले शादी हुई थी। प्रशांत पहले सेल्स टैक्स ऑफिसर थे। कुछ दिन काम करने के बाद उन्होंने फिर से तैयारी की और पीसीएस चुने गए। वह 10 अप्रैल को बरेली में ज्वाइन करने आए थे लेकिन चुनाव होने के चलते उन्हें कोई पोस्टिंग नहीं मिली। ऐसे में छुट्टी लेकर वह लखनऊ चले गए थे। लखनऊ में उन्हें कोविड हो गया। वहां इलाज बेहतर न होने पर प्रशांत को भोजीपुरा स्थित निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
यहां हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। उसके बाद लगातार ऑक्सीजन स्तर गिरता गया। प्रशांत की भांजी ने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें प्रधानमंत्री से मामा को एयर एंबुलेंस कराने की मांग की थी। परिजनों ने निजी तौर पर दिल्ली के मशहूर अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करके बेड बुक किया था।
उसके बाद दो विमान कंपनियों से एयरलिफ्ट के लिए वार्ता की। इसमें करीब साढ़े 8 लाख रुपये खर्च हुए। प्रशांत को रविवार को एयर लिफ्ट किया जाना था, लेकिन मौसम खराब होने से विमान कंपनियों ने इंकार कर दिया था। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे प्रशांत को एयरलिफ्ट किया गया लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।
नाम चाहते थे प्रशांत, इसलिए फिर तैयारी की थी
प्रशांत के रिश्तेदार ने फोन पर बताया कि प्रशांत अपने भाई की तरह सेल्स टैक्स में नौकरी कर रहे थे लेकिन कुछ साल नौकरी करने के बाद कहा कि इस नौकरी में नाम नहीं है। इस पर उन्होंने फिर से तैयारी की और फिर पीसीएस में चयन हो गया लेकिन किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि उनकी इस तरह से मौत हो जाएगी। प्रशांत की मौत के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि इंतजाम न होने की वजह से एक होनहार अधिकारी इस दुनिया से चला गया। परिजनों को इस बात का दुख नहीं है कि प्रशांत के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए, बल्कि इस बात का दुख है कि बेहतर इलाज न मिलने से उनकी जान नहीं बचायी जा सकी।
