बरेली: कलेक्ट्रेट में फैली भ्रष्टाचार की जड़ें काटने में ट्रांसफर नीति भी फेल
बरेली, अमृत विचार। स्थानांतरण नीति ने बरेली के कई सरकारी विभागों में दशकों से पनप रहीं भ्रष्टाचार की ऐसी जड़ों को उखाड़ दिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की। जब भी तबादले हुए, कर्मचारियों ने धन और राजनीतिक दलों की पहुंच के सहारे निरस्त करा लिए लेकिन पहली बार उन्हें मलाई वाली सीटें छोड़नी पड़ीं। …
बरेली, अमृत विचार। स्थानांतरण नीति ने बरेली के कई सरकारी विभागों में दशकों से पनप रहीं भ्रष्टाचार की ऐसी जड़ों को उखाड़ दिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की। जब भी तबादले हुए, कर्मचारियों ने धन और राजनीतिक दलों की पहुंच के सहारे निरस्त करा लिए लेकिन पहली बार उन्हें मलाई वाली सीटें छोड़नी पड़ीं।
इसमें सबसे ज्यादा सीएमओ कार्यालय, जिला अस्पताल के बाबुओं को जड़ें गहरी थीं। इसके साथ तहसीलों में 10 साल से अधिक समय से जमे रहकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे लेखपाल भी अपनी कुर्सी नहीं बचा सके लेकिन स्थानांतरण नीति कलेक्ट्रेट में फैली भ्रष्टाचार की जड़ों को हिला तक नहीं सकी।
कलेक्ट्रेट में कई ऐसे वरिष्ठ लिपिक और कनिष्ठ लिपिक हैं जो एक ही स्थान पर तीन साल नहीं बल्कि 10 से 15 साल से जमे हुए हैं। कई बाबू तो कलेक्ट्रेट से सेवानिवृत्त हो गए। एक दो बार तबादला होने के बाद लौटकर यहीं आ गए और पूरी नौकरी यहीं पर काटकर सेवानिवृत्त हुए।
कलेक्ट्रेट के सूत्र बताते हैं कि एक वरिष्ठ अधिकारी के कार्यालय में दो बाबू ऐसे हैं जो 15 से 20 साल से जमे हैं। एक ही दफ्तर में इतने साल से जमे रहने के बावजूद उनका कभी तबादला नहीं हुआ। कलेक्ट्रेट में ही जिले के एक अधिकारी के कार्यालय में एक बाबू तो 10 साल से जमे हैं। कई अधिकारी बदल गए लेकिन उनकी सीट नहीं बदली। सबसे दिलचस्प बात यह है कि तीन लिपिक कोरोना काल में सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उन्होंने अभी तक अपना पूर्णरूप से चार्ज नहीं सौंपा है।
माना जा रहा है कि उनके कार्यकाल में कई गड़बड़ियां की गयीं। इसलिए पोल खुलने के डर से वे चार्ज नहीं दे रहे हैं। एक सेवानिवृत्त बाबू की गड़बड़ियां जिलाधिकारी ने पकड़ीं। बाबू के खिलाफ विभागीय जांच तक चल रही है। नजारत की जिम्मेदारी अभी तक पूर्ण रूप से किसी को नहीं दी है। जबकि प्रशासन का नजारत सबसे महत्वपूर्ण पटल है। यहीं से प्रशासनिक खर्च का पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है। तीन दिन से हर तरफ तबादलों का शोर मचा है। ऐसे में कलेक्ट्रेट के बाबुओं के तबादले न होने की चर्चा भी खूब हो रही है।
