मुरादाबाद : एडीजी के सामने इंसास नही खोल पाया जीआरपी कांस्टेबल, शर्म की बात
मुरादाबाद,अमृत विचार। भले ही पुलिस को आधुनिक शस्त्रों से लैस किया गया हो। लेकिन, शस्त्र संभालना तो दूर, उन्हें खोलना तक जवानों को नही आता। यह लापरवाही सोमवार को उस समय उजागर हुई, जब अपर पुलिस महानिदेशक जीआरपी पुलिस लाइन का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने एक आरक्षी से जब इंसास खोलने के लिए कहा तो …
मुरादाबाद,अमृत विचार। भले ही पुलिस को आधुनिक शस्त्रों से लैस किया गया हो। लेकिन, शस्त्र संभालना तो दूर, उन्हें खोलना तक जवानों को नही आता। यह लापरवाही सोमवार को उस समय उजागर हुई, जब अपर पुलिस महानिदेशक जीआरपी पुलिस लाइन का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने एक आरक्षी से जब इंसास खोलने के लिए कहा तो वह उसे हाथ में लेकर इधर-उधर से देखने लगा। इस पर उन्होंने कांस्टेबलों को शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
सोमवार को एडीजी जीआरपी पीयूष आनंद जीआरपी पुलिस लाइन पहुंचे। वहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने मीटिंग हॉल व आदेश कक्ष का फीता काटकर उद्धाटन किया। इसके बाद बैरक, भोजनालय सहित अन्य कक्षों का निरीक्षण कर खामियों को दूर करने के निर्देश दिए। इसके बाद वह शस्त्रागार पहुंचे। वहां शस्त्र ग्रह में चार्ट न होने पर नारागजी व्यक्त की।
इसके बाद शस्त्र ग्रह के बाहर तैनात कांस्टेबल से उन्होंने इंसास खोलने के लिए कहा तो वह घबरा गया। इस पर एडीजी ने उससे धैर्य रखकर उसे खोलने के लिए कहा। लेकिन, कांस्टेबल उसे खोलना तो दूर, उसमें से मैगजीन तक नहीं निकल सका। इस पर पास खड़े अधिकारी ने स्वयं उसे लेकर लॉक खोला तथा मैगजीन निकाली।
एडीजी ने अन्य आरक्षियों से भी इंसास खोलने के सम्बंध में पूछा तो उन्होंने भी स्पष्ट इनकार कर दिया। एडीजी ने कहा कि शस्त्र खोलने के साथ ही उन्हें चलाना भी आना चाहिए। उन्होंने एसपी रेलवे अपर्णा गुप्ता को कांस्टेबलों को शस्त्र चलाने, उन्हें खोलने व बंद करने आदि का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। इस दौरान आरआई राकेश कुमार उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
स्वतंत्राता दिवस को लेकर बढ़ाई चौकसी
पत्रकारों से वार्ता करते हुए एडीजी पीयूष आनंद ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। 15 अगस्त को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी गई है, सुरक्षा व्यवस्था को और भी बेहतर किया जाएगा। कहा कि जीआरपी की सुरक्षा व्यवस्था स्टेशन से लेकर ट्रेनों तक में हमेशा चाकचौबंद रहती है।
कोविडकाल में जीआरपी ने ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूपी एटीएस ने आतंकवादियों को पकड़ा है, उसके बाद से हमारी सतर्कता और बढ़ गई है। कहा कि जीआरपी स्क्वैड को अभी बॉडीवार्न कैमरे नहीं दिए गए हैं। ब्लूटूथ डिवाईस जवानों को उपलब्ध करा दी गई है। इससे वे यात्रियों को लगातार सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं।
इधर-उधर नही, आंखों में देखें
एडीजी के पुलिस लाइन पहुंचने पर सबसे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने सलामी दे रहे जवान को फटकार लगाते हुए कहा कि जब आप सलामी दें तो आपकी आंखे सामने खड़े अधिकारी की आंखों से मिलनी चाहिए। लेकिन, सलामी के दौरान आप इधर-उधर देख रहे हैं। इसमें आगे से सुधार होना चाहिए।
कब स्थापित हुई जीआरपी, नहीं मालूम
एडीजी रेलवे पीयूष आनंद ने बैरक की बदहाल स्थिति देखकर चिंता व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने बैरक कब स्थापित हुई की जानकारी एसपी रेलवे से लेनी चाही तो उन्होंने बैरक लगभग 50 वर्ष पुरानी बताई। इसके बाद जब एडीजी ने मुरादाबाद में जीआरपी कब स्थापित हुई के संबंध में पूछा तो अधिकारी बगलें झांकते नजर आए।
चौकियों का करें नियमित निरीक्षण
एडीजी ने जीआरपी थाने से संबंधित चौकियों में शस्त्रों की जानकारी भी ली। कहा कि जिन चौकियों में सर्वाधिक शस्त्र दिए गए हैं, उनका नियमित रूप से निरीक्षण भी किया जाए। इसके साथ ही शस्त्रों की स्थिति भी देखी जाए कि वह चलने की स्थिति में हैं भी या नहीं।
