बरेली: गांधी आश्रम खादी भंडार को नहीं मिला सरकार का सहयोग
बरेली, अमृत विचार। गांधी जी ने अंग्रेजों की कमर तोड़ने के लिए चरखा चलाकर सूत कातकर देशवासियों को स्वदेशी वस्त्र पहनने के लिए प्रेरित किया था। देश आजाद होने के बाद रोजगार के लिए लोगों ने सूत से कपड़े बनाने का काम किया। इन्हीं कपड़ों और अन्य सामग्री को बेचने के लिए जगह- जगह गांधी …
बरेली, अमृत विचार। गांधी जी ने अंग्रेजों की कमर तोड़ने के लिए चरखा चलाकर सूत कातकर देशवासियों को स्वदेशी वस्त्र पहनने के लिए प्रेरित किया था। देश आजाद होने के बाद रोजगार के लिए लोगों ने सूत से कपड़े बनाने का काम किया। इन्हीं कपड़ों और अन्य सामग्री को बेचने के लिए जगह- जगह गांधी आश्रम खादी भंडार केंद्र खोले गए। जिससे लोग इन केन्द्रों पर जाकर अपनी जरूरत के कपड़े आदि अन्य वस्तुएं खरीदते थे।
बरेली में 1957 में नॉवल्टी चौराहे पर पहला खादी भंडार का केन्द्र खोला गया। उसके बाद धीरे- धीरे जिले के कस्बों और तहसील में 50 खादी भंडार के केन्द्र खोले गए थे। जिसमें 300 कर्मचारी काम कर रहे थे। शुरू में बरेली में भी कारीगरों द्वारा खादी भंडार के कपड़े तैयार किए जाते थे लेकिन कारीगरों की जरूरतें पूरी न होने के कारण यहां कपड़े बनने बंद हो गए थे। वर्तमान में बरेली जिले में खादी भंडार के सिर्फ 11 केंद्र ही चल रहे हैं। जिसमें 53 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि जो नेता खादी के कपड़े पहनकर बड़े- बड़े भाषण देते हैं, अगर वह खादी उद्योग की ओर ध्यान देते तो इसके दिन सुधर जाते लेकिन वह लोग सिर्फ मीडिया में तो दिखाते हैं कि हम खादी उद्योग को इतना बढ़ा रहे हैं लेकिन वास्तव में खादी भंडार के कर्मचारियों को कोई मदद नहीं मिल रही है। उन्होनें बताया कि बरेली जिले के कर्मचारियों को 2 करोड़ 95 लाख फंड नहीं मिल पाया है।
ज्यादा नहीं हो रही बिक्री
खादी भंडार पर पहले की तरह कपड़े नहीं है। बदलते समय के साथ केंद्र पर नए तरीके के कपड़ों को बेचा जा रहा है। शौकीन युवा, बुजुर्ग और महिलाएं केंद्र पर कपड़े खरीदने पर आ रहे हैं। खादी कपड़ा महंगा होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति केंद्र से नहीं खरीदना चाहता है। केंद्र संचालक ने बताया कि छूट होने पर तो लोग केंद्र पर ज्यादा खरीददारी करने आते हैं। उन्होनें बताया कि खादी पर अभी 10 फीसदी छूट चल नही है। ग्रामोद्योग के तहत गांधी आश्रम में कई वस्तुओं का विक्रय किया जा रहा है। जिसमें घरेलू उपयोग और सौन्दर्य से संबधित वस्तुएं बेची जा रही हैं।
सरकार को खादी भंडार में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए कि वह किस परेशानी से जूझ रहे हैं। कर्मचारियो को हो रही फंड और मानदेय की समस्या को दूर करना चाहिए। -देवधारी यादव, संचालक
दिक्कतें तो आ रही हैं लेकिन क्या करें काम तो कर रहें। इसे छोड़ भी नहीं सकते। हम गांधीवादी लोग हैं लेकिन सरकार को कर्मचारियों की दिक्कतों को दूर करना चाहिए। -अजय कुमार उपाध्याय, संचालक
कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं। दुकान पर ग्राहक भी कम आ रहे हैं। जिससे केंद्र पर माल भरा हुआ है। ज्यादातर लोग महंगी चीजे होने की वजह से खादी भंडार से नहीं खरीदते हैं। -वीरेंद्र शर्मा, संचालक
कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। 2.95 करोड़ का फंड अभी तक कर्मचारियों को नहीं मिल पाया है, जिससे कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। सरकार अगर सहयोग कर दे तो हम लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी। -अनिल कुमार, सचिव क्षेत्रीय गांधी आश्रम
