यूपी: चुनाव आयोग की वेबसाइट हैक कर बनाया 30 हजार फर्जी वोटर कार्ड, ऐसे हुआ खुलासा
लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग के अफसरों के पासवर्ड हैक करके सहारनपुर के एक युवक ने करीब 30 हजार फर्जी वोटर कार्ड बना डाले। पुलिस ने वोटर कार्ड बनाने वाले विपुल सैनी को सहारनपुर में उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि मास्टर माइंड अरमान को भी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरोह …
लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग के अफसरों के पासवर्ड हैक करके सहारनपुर के एक युवक ने करीब 30 हजार फर्जी वोटर कार्ड बना डाले। पुलिस ने वोटर कार्ड बनाने वाले विपुल सैनी को सहारनपुर में उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि मास्टर माइंड अरमान को भी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरोह के और सदस्यों की तलाश चल रही है। इस भंडाफोड़ ने खूफिया एजेंसियों के कान भी खड़े कर दिए हैं और इसके अन्तरराष्ट्रीय लिंक भी एजेंसियां तलाश रही हैं।
पुलिस के अनुसार करीब छह महीने से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। भारत निर्वाचन आयोग के अफसरों को जब संदेह हुआ तो उन्होंने अपने स्तर पर प्रारंभिक छानबीन की तो पता चला कि यह सारा खेल सहारनपुर से ऑपरेट हो रहा है। आयोग ने पुलिस के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। उसके बाद सहारनपुर की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को देर रात विपुल सैनी को नकुड़ कोतवाली के माछरहेड़ी स्थित उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया। उधर, दिल्ली पुलिस ने इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड मध्यप्रदेश निवासी अरमान को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि पुलिस गिरफ्तारी की जानकारी देने के अलावा कुछ स्पष्ट नहीं बता रही है, लेकिन पुलिस ने विपुल सैनी के बैंक खाते में जमा करीब 45 लाख रुपये पर रोक लगवा दी है। बताया जा रहा है कि फर्जी वोटर कार्ड बनाकर उसने करीब साठ लाख रुपये की कमाई की है। क्राइम ब्रांच प्रभारी अविनाश गौतम ने साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। सहारनपुर के एसएसपी सहारनपुर एस चिनप्पा ने बताया कि आरोपी को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी पूछताछ चल रही है।
कंप्यूटर एक्सपर्ट है विपुल सैनी
आरोपी विपुल सैनी बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) है और कंप्यूटर व आईटी का अच्छा जानकार है। पूछताछ से पता चला है कि अरमान उसका दोस्त है और उसी के कहने पर उसने फर्जी वोटर कार्ड बनाने का काम शुरू किया था। अरमान ही उसे टारगेट देता था। ज्यादातर वोटर कार्ड राजस्थान और मध्यप्रदेश के बनाए गए हैं। विपुल को प्रति कार्ड 200 रुपये अरमान दिया करता था। इस गिरोह में कई राज्यों के युवा जुड़े बताए जा रहे हैं।
अरमान ही उगलेगा असल सच्चाई
यह फर्जीवाड़ा करने के पीछे केवल पैसा कमाना था, या कुछ राष्ट्रविरोधी मंशा भी है? इस सवाल का जवाब पुलिस और खूफिया एजेंसियों को अरमान से पूछताछ के बाद ही पता लगेगा। यही नहीं उससे गिरोह के अन्य सदस्यों की भी जानकारी मिलेगी।
इसलिए सतर्क हैं खूफिया एजेंसियां
चुनाव आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी से खूफिया एजेंसियां यों ही परेशान नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि कहीं भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों व म्यांमार से आए रोहिंग्या भी तो इनके जरिए वोटर कार्ड न ले रहे हों। यूपी एटीएस ने करीब एक माह पहले ही गाजियाबाद और बरेली से पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जो बांग्लादेश और म्यांमार से आए थे। उनके पास सभी जरूरी भारतीय दस्तावेज आधार, पैन, मतदाता पहचान पत्र आदि मिले थे। यह लोग और लोगों को भी लाकर बसा रहे थे। खुफिया एजेंसियां इस गिरोह से भी विपुल और अरमान के लिंक तलाश रही हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन और अन्य वेबसाइटों में सेंधमारी की छानबीन भी हो रही है।
आयोग के अफसर ने बरती थी लापरवाही
सहारनपुर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ माह पूर्व भारत निर्वाचन आयोग के जिला कार्यालय के एक अधिकारी ने विपुल सैनी की शॉप पर आकर कुछ कागजात प्रिंट कराए थे। उस वक्त उक्त अधिकारी ने अपने पासवर्ड आदि भी विपुल को दिए थे। माना जा रहा है कि यहीं से यह सेंध लगी थी।
