बरेली: लाल फाटक-बदायूं रोड तक चौड़ीकरण में आ रहे 1000 पेड़

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बरेली, अमृत विचार। लाल फाटक से बदायूं रोड के चौड़ीकरण की जद में करीब 1000 पेड़ आ रहे हैं। इस सड़क को चौड़ा करने के लिए कुछ दिन पहले पीडब्ल्यूडी के साथ वन विभाग की टीम ने संयुक्त सर्वे किया था। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने तो यह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है लेकिन वन …

बरेली, अमृत विचार। लाल फाटक से बदायूं रोड के चौड़ीकरण की जद में करीब 1000 पेड़ आ रहे हैं। इस सड़क को चौड़ा करने के लिए कुछ दिन पहले पीडब्ल्यूडी के साथ वन विभाग की टीम ने संयुक्त सर्वे किया था। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने तो यह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दे दी है लेकिन वन विभाग के अधिकारियों को अब यह अध्ययन करना है कि इसमें कितने पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा सकता है। इसके बाद ही रोड निर्माण के कार्य को शुरू कराया जाना है।

लालफाटक से बदायूं स्टेट हाईवे तक की सड़क 4.3 किलोमीटर लंबी है लेकिन अभी इस सड़क की चौड़ाई काफी कम है और उसकी दशा भी खराब है। लालफाटक क्रासिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है। काफी हद तक यह काम पूरा भी हो चुका है। इस सड़क को चौड़ा करने की कार्ययोजना पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन ने शासन को भेजी थी।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह लालफाटक से बदायूं मार्ग तक फोरलेन निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी शासन से मिल गई। करीब 26 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। इस रोड के निर्माण कार्य के लिए एक निजी कंपनी को ठेका भी दिया जा चुका है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की घोषणा में लालफाटक-बदायूं मार्ग फोरलेन बनाने के प्रोजेक्ट को शामिल किए जाने के बाद से ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इसका निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने में लगे हुए हैं।

इसके तहत लालफाटक से बदायूं रोड तक दोनों साइड में पेड़ हैं। कुछ दिन पहले वन विभाग, पीडब्ल्यूडी और निजी कंपनी के अधिकारियों ने पेड़ों का सर्वे शुरू किया था। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को दे दी है। इसके तहत रोड चौड़ीकरण के काम में करीब एक हजार पेड़ जद में आ रहे हैं। पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कम से कम पेड़ों के कटान के लिए अधिकारी पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने के विकल्प पर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने बताया कि पेड़ों की स्थिति के आधार पर कितने पेड़ ट्रांसलोकेट हो सकते हैं, इस पर अध्ययन किया जा रहा है।

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