लखनऊ: उपभोक्ता परिषद ने केंद्र के नये बिजली कानून का किया सख्त विरोध
लखनऊ। विद्युत व्यथा निवारण फोरमों के लिए बुधवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग में केंद्र सरकार के नए व्यथा निवारण फोरम रेग्यूलेशन 2021 के प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई हुई। आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह व सदस्यों कौशल किशोर शर्मा, विनोद कुमार श्रीवास्तव की उपस्थिति में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने नए …
लखनऊ। विद्युत व्यथा निवारण फोरमों के लिए बुधवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग में केंद्र सरकार के नए व्यथा निवारण फोरम रेग्यूलेशन 2021 के प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई हुई। आयोग के चेयरमैन आरपी सिंह व सदस्यों कौशल किशोर शर्मा, विनोद कुमार श्रीवास्तव की उपस्थिति में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने नए प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 42 (5) के तहत विद्युत व्यथा निवारण फोरम के नियम व इसके गठन का अधिकार राज्य के नियामक आयोगों को है। केंद्र सरकार अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रही है। नया कानून निजी घरानों के हित में है। उपभोक्ता प्रतिनिधि भले ही फोरमों में शामिल रहेंगे लेकिन फोरम का अध्यक्ष अगर बिजली अभियंता होगा तो वह अपनी ही शिकायत को अपने खिलाफ क्यों निर्णय करेगा?
सुनवाई में प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों ने अपनी बात रखी और कहा कि सैकड़ों की संख्या में हर कम्पनी में फोरम बनाने की आवश्यकता होगी। चेयरमैन ने कहा कि उपभोक्ताओं के हित को प्राथमिकता देते हुए ही किसी भी नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा। रमा शंकर अवस्थी एडवोकेट, पीसी जैन, एडवोकेट अरुण मिश्रा, इफिता खान, कनिका बलानी, एडवोकेट अभिषेक व एडवोकेट दिव्यांशु भट्ट ने भी सुनवाई में अपना पक्ष रखा।
क्या है नए कानून का प्रस्ताव
वर्तमान में विद्युत नियामक आयोग द्वारा मंडल स्तर पर विद्युत व्यथा निवारण फोरम बने हैं, जिसमें बिजली चोरी को छोड़कर बिलिंग, मीटर आदि समस्याओं की सुनवाई होती है। अब नए कानून के तहत प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियों को एसडीओ, अधिशासी अभियन्ता, सर्किल, जोनल व कम्पनी स्तर पर विद्युत व्यथा निवारण फोरम बनाने होंगे। जिसमें 2 उपभोक्ता प्रतिनिधि, 1 सोलर उपभोक्ता प्रतिनिधि व आयोग द्वारा नामित एक स्वतंत्र प्रतिनिधि को शामिल करना अनिवार्य होगा। फोरम का चेयरमैन हर स्तर पर लाइसेंसी वितरण कंपनी का अभियंता होगा।
