बरेली: एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में चैलेंज मूल्यांकन के आवेदन कल से, तीन सितंबर अंतिम तिथि

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिवा फुले एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्रों को एक बार फिर से चुनौती मूल्यांकन (Challenged Evaluation) का मौका मिलने जा रहा है। कल यानि शनिवार से एमबीबीएस (MBBS) के छात्र चैलेंज मूल्यांकन के लिए निश्चित धनराशि जमा करने के बाद आवेदन कर सकते है। आवेदन की अंतिम तिथि 3 सितंबर को …

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिवा फुले एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्रों को एक बार फिर से चुनौती मूल्यांकन (Challenged Evaluation) का मौका मिलने जा रहा है। कल यानि शनिवार से एमबीबीएस (MBBS) के छात्र चैलेंज मूल्यांकन के लिए निश्चित धनराशि जमा करने के बाद आवेदन कर सकते है। आवेदन की अंतिम तिथि 3 सितंबर को होगी। इसके बाद किसी भी छात्र को चैलेंज मूल्यांकन के आवेदन के लिए मौका नहीं दिया जाएगा।

एमबीबीएस प्रथम और तृतीय वर्ष के छात्रों को मौका
रुहेलखंड यूनिवर्सिटी (Ruhelkhand university) की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक एमबीबीएस प्रथम प्रोफेशनल, एमबीबीएस तृतीय प्रोफेशन पार्ट सेकेंड के छात्र-छत्राएं 28 अक्टूबर से आवेदन शुरू कर सकते है। इसी के साथ एमडी (MD) और एमएस (MS) के छात्र भी चैलेंज मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते है। यह आवेदन एमजेपी रुहेलखंड की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन किया जाएगा। तीन सितंबर के बाद कोई भी छात्र-छात्रा मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर सकता है।

दो चरणों में पूरा होगा चैलेंज मूल्यांकन
चैलेंज मूल्यांकन के लिए परीक्षार्थी को आवेदन करते समय प्रति प्रश्नपत्र 300 रुपये जमा करना होगा। जिसके बाद परीक्षार्थी को मूल्यांकित मूल उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी (Scanned Copy) देखने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद यदि छात्र को अपने मूल्यांकन से संतुष्टि नहीं है तो वह दूसरे चरण में चैलेंज मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। उसके आधार पर उसकी कॉपी को दोबारा से जांचा जाएगा।

हर वर्ष चैलेंज मूल्यांकन के आते है आवेदन
विश्वविद्यालय में हर वर्ष हजारों की संख्या में छात्र अपने मूल्यांकन से संतुष्ट दिखाई नहीं देते। जिसकी वजह से वह चैलेंज मूल्यांकन के लिए आवेदन करते है। इस वार भी हजारों की संख्या में आवेदन आने की उम्मीद जताई जा रही है। विश्वविद्यलाय के जानकारों की माने तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि छात्रों की कॉपी को जांचते समय सतर्कता नहीं बरती जाती। इसलिए छात्रों को चैलेंच मूल्यांकन का सहारा लेना पड़ता है।

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