मुरादाबाद: ठगी का नया तरीका,सरकारी ऑफर को ‘हथियार’ बना रहे साइबर ठग

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मुरादाबाद, अमृत विचार। लोगों को ठगने के लिए साइबर ठग नई-नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनता जब तक ठगी के पुराने हथकंडों को लेकर सतर्क होती है, तब तक ठग नए हथियार का प्रयोग करने लगते हैं। साइबर ठगों ने अब लोगों को चूना लगाने के लिए नई तकनीक खोज ली है। लोगों …

मुरादाबाद, अमृत विचार। लोगों को ठगने के लिए साइबर ठग नई-नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनता जब तक ठगी के पुराने हथकंडों को लेकर सतर्क होती है, तब तक ठग नए हथियार का प्रयोग करने लगते हैं। साइबर ठगों ने अब लोगों को चूना लगाने के लिए नई तकनीक खोज ली है।

लोगों को फ्री में सरकारी लैपटॉप के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर ठगा जा रहा है। इसके अलावा सरकारी नौकरी के लिए आवेदन, फ्री रिचार्ज करने के लिए भी लिंक भेजकर ठगी की जा रही है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई मैसेज आए तो सावधान हो जाएं। फ्री लैपटॉप के लालच में फंसने की गलती आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। महानगर में तमाम लोग इस तरह की ठगी का शिकार हो चुके हैं। जिनकी रकम ज्यादा होती है, वह तो पुलिस के पास जाते हैं मगर कम रकम गंवाने वाले तो शिकायत तक नहीं करते।

लिंक पर क्लिक करते ही मैसेज हो जाता है सेंड
फ्री लैपटॉप पाने के लिए आप जैसे ही साइबर ठगों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करते हैं, वैसे ही वह मैसेज आपके मोबाइल फोन में सेव सभी नंबरों पर खुद ही सेंड हो जाता है। एक बार में यह मैसेज 100 लोगों तक पहुंच जाता है। इसके बाद एक एप भी लिंक पर क्लिक करने वाले के मोबाइल फोन में डाउनलोड हो जाता है। फिर एक लैपटॉप की फोटो भी दिखाई देगी। वहां लैपटॉप के रजिस्ट्रेशन का ऑप्शन भी नहीं आएगा, लेकिन लिंक आपके फोन में सेव मोबाइल नंबरों पर सेंड हो जाएगा।

क्लिक करने से पूर्व अच्छी तरह से परखें
साइबर एक्सपर्ट मनीष गोयल ने बताया कि किसी भी वेबसाइट या कंपनी की वेबसाइट पर जाने से पहले उसकी अच्छी तरह से जांच-पड़ताल जरूर करें। वेबसाइट का डोमेन डॉट कॉम, डॉट इन आदि होता है। डोमेन में डॉट सीसी, डॉट एलटीडी जैसे अजीब शब्द हों तो वह फर्जी होगी। ऐसी वेबसाइट पर कोई भी निजी जानकारी कदापि साझा न करें। प्रयोगकर्ता को इन फर्जी कंपनियों के भ्रामक जाल से फंसने से बचने के लिए सवधानी रखनी चाहिए।

केस-1
फ्री लैपटॉप के लालच में गंवाए 22 हजार
जिगर कालोनी निवासी रेहाना खातून छात्रा हैं। 27 जुलाई को उनके मोबाइल पर सरकार की ओर से फ्री लैपटॉप के लिए रजिस्ट्रेशन करने का लिंक आया था। बताया कि लालच में आकर उन्होंने उस लिंक पर क्लिक कर दिया। इसके बाद उनके मोबाइल पर अकाउंट से 22 हजार रुपये कटने का मैसेज आया। पीड़िता ने पुलिस और बैंक में जाकर मामले की शिकायत की।

केस-2
फ्री रीचार्ज के चक्कर में लगा 13 हजार रुपये का चूना
पीतल फर्म में काम करने वाले करुला निवासी जीशान भी लालच में आकर 13 हजार रुपये गंवा बैठे। उनके मोबाइल पर पहली जून को फ्री रीचार्ज का लिंक आया था। क्लिक करने पर रीचार्ज तो नहीं हुआ लेकिन पलक झपकते ही उनके खाते से 13 हजार रुपये कट गए। बैंक और पुलिस में शिकायत की है, मगर अभी कोई नतीजा नहीं निकला।

केस-3
मामला समझ में आने से पहले ही लिंक हो गया सेंड
गलशहीद के बड़ा अहाता निवासी अब्दुल वाजिद पीतल कारोबारी हैं। उनका बेटे अब्दुल वासित ने इस साल 12वीं कक्षा पास की है। उसके मोबाइल पर भी फ्री लैपटॉप का लिंक आया। जब तक मामला समझ में आया तब तक लिंक सेंड भी हो गया। इसके साथ ही उसके मोबाइल में सेव 100 नंबरों पर वह लिंक खुद-ब-खुद ही पहुंच गया। अब्दुल वासित के अकाउंट में मात्र 730 रुपये ही थे। इसलिए वह ठगी का शिकार होने से बच गए।

यह हो सकता है नुकसान
साइबर ठगों द्वारा भेजे गए फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही आपकी पर्सनल जानकारी ठगों के पास पहुंच जाती है। इसके बाद वह इसका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आपके फोन में सेव पर्सनल फोटो, डाक्यूमेंट्स और अन्य डाटा चोरी हो सकता है। पर्सनल डाटा चोरी कर साइबर ठग आपको ब्लैकमेल भी कर सकते हैं।

यह बरतें सावधानी
सोशल साइट पर जो भी लिंक वायरल किए जाते हैं, उन पर बिना जांच-पड़ताल के कतई भरोसा न करें।
सरकार की ओर से जारी होने वाले लिंक या वेबसाइट की अधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
बिना जांच-पड़ताल किए कोई भी लिंक दूसरों को शेयर न करें।इस प्रकार के लिंक या वेबसाइट से ठगी या धोखाधड़ी होने पर पुलिस को अवश्य सूचना दें।
ठग जो भी लिंक या वेबसाइट वायरल कर रहे हैं, उसका नाम या स्पेलिंग असली से मिलती-जुलती रखते हैं। इसलिए नाम व स्पेलिंग पर विशेष ध्यान दें।

इस तरह की घटनाओं से जागरूकता से ही बचा जा सकता है। लालच के चक्कर में ही लोग इसमें फंस जाते हैं। इसलिए जागरूक रहें और इस तरह के फ्री ऑफरों के लिंक पर कभी क्लिक न करें। नरेशपाल सिंह, एसएचओ, साइबर थाना

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