बरेली: सिर्फ 10 फीसदी वाहनों में लगा आरएफ टैग, नहीं रुक रही टैक्स चोरी
बरेली, अमृत विचार। जीएसटी चोरों पर शिकंजा कसने के लिए शासन भले ही सख्ती का दावा करे लेकिन सरकारी मशीनरी की हीलाहवाली इसमें पलीता लगा रही है। करीब पांच महीने पूर्व सरकार ने सभी ट्रकों पर आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आईडी टैग अनिवार्यता के साथ लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक मात्र दस फीसदी …
बरेली, अमृत विचार। जीएसटी चोरों पर शिकंजा कसने के लिए शासन भले ही सख्ती का दावा करे लेकिन सरकारी मशीनरी की हीलाहवाली इसमें पलीता लगा रही है। करीब पांच महीने पूर्व सरकार ने सभी ट्रकों पर आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आईडी टैग अनिवार्यता के साथ लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक मात्र दस फीसदी यानि 300 वाहनों में ही यह टैग लग सका है। जबकि 3000 वाहनों में लगाना है।
जानकार बताते हैं कि यह टैग फास्टैग की तर्ज पर काम करता है। टैग लगा होने पर टोल या जिले की सीमा पार करते ही ट्रक का ब्योरा एक रेडियो फ्रीक्वेंसी टॉवर के माध्यम से वाणिज्यकर विभाग के लखनऊ स्थित सर्वर पर आटोमैटिक दर्ज होता है, जिसमें ट्रक नंबर, उस नंबर पर बने ईवे बिल का पूरा ब्योरा होता है। 24 घंटे की अवधि में ट्रक जिले की सीमा या टोल से दो या तीन बार गुजरता है, तो उसका ब्योरा भी आ जाता है। माना जा रहा था कि इस व्यवस्था के प्रभावी तरीके से लागू होने पर जहां ओवरलोडिंग पर लगाम लगेगी, वहीं ट्रांसपोर्टर्स में भी जुर्माने का डर बना रहेगा।
आरएफ आईडी टैग इसलिए भी जरूरी
सरकार की सुविधाओं का व्यापारी गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं। वे टैक्स जमा करने के बजाए चोरी कर रहे हैं। अनलॉक में भी इसका खूब फायदा उठाया जा रहा है इसलिए अब जिम्मेदार किसी भी तरह से टैक्स चोरी नहीं होने देना चाहते। ट्रांसपोर्टर यदि गलती करता है तो पहली बार में दो हजार रुपये और बार-बार पकड़े जाने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूलने का प्रावधान है।
300 ट्रकों में लगे आरएफ टैग
ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शोभित सक्सेना का कहना है कि जीएसटी चोरी पर लगाम कसने को सरकार की यह व्यवस्था काफी हद तक ठीक है। कैंप लगाकर ट्रकों में टैग लगाए जा रहे हैं। करीब 300 वाहनों में आरएफ टैग लग चुके हैं। सरकार को इस पर सख्ती करना चाहिए। इसका सरकारी रेट लगभग 85 रुपये है, जो हमेशा बना रहेगा, बशर्ते टैग से छेड़छाड़ न हो।
टैक्स चोरी रोकने में मददगार होगा टैगिंग सिस्टम
अभी तक काराबोरी व ट्रांसपोर्टर आपस में मिल पर ई-वे बिल का दुरुपयोग कर टैक्स की चोरी कर रहे थे। इस सिस्टम के लागू होने पर ई-वे बिल का दुरुपयोग नहीं हो सकेगा। जिससे दूसरे प्रांतों को जाने वाले और आने वाले माल पर टैक्स चोरी पर अंकुश लग जाएगा। – गौरीशंकर, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्यकर विभाग
