रायबरेली: कांग्रेस में बड़े पदाधिकारियों के सामने छोटे कार्यकर्ताओं को मिल रही तवज्जो

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

रायबरेली। कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाला रायबरेली आज भितरघात से जूझ रहा है। हालत यह है कि बड़े पदाधिकारियों का अफना गुट है तो कार्यकर्ताओं ने अपना गुट बना लिया है। असल में यह स्थिति बड़े पदाधिकारियों की चौधराहट के कारण सामने आई है। पिछले तीन साल से छोटे कार्यकर्ता न तो सांसद सोनिया …

रायबरेली। कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाला रायबरेली आज भितरघात से जूझ रहा है। हालत यह है कि बड़े पदाधिकारियों का अफना गुट है तो कार्यकर्ताओं ने अपना गुट बना लिया है। असल में यह स्थिति बड़े पदाधिकारियों की चौधराहट के कारण सामने आई है। पिछले तीन साल से छोटे कार्यकर्ता न तो सांसद सोनिया गांधी से मिल पा रहे हैं और न ही प्रियंका वाड्रा से। बड़े पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को बाहर से ही लौटा देते हैं। नतीजा यह रहा कि पंचायत चुनाव में सपा के समर्थन के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस से छिटक गई।

रविवार को प्रियंका वाड्रा भुएमऊ गेस्टहाउस में बैठक कर रही हैं तो.बाहर कार्यकर्ता आस लगाए हैं कि उनकी भी सुनी जाएगी। गेस्ट हाउस के बाहर कार्यकर्ता पेड पदाधिकारियों की मनमर्जी से परेशान हैं। उनका कहना है कि बूथ पर पदाधिकारी कभी नहीं जाते और कार्यकर्ता दौड़ लगाते हैं। क्या परेशानी है इस पर कोई तवज्जो नहीं दी जाती है। दबी जुबान से कार्यकर्ताओं का कहना है कि यही कारण है सदर विधायक पार्टी से मुंह फेरे हुई हैं।

सदर में कांग्रेस का विधायक होने के बाद भी पार्टी मजबूती से खड़ी नहीं हो पा रही है। इसका मुख्य कारण केवल बड़े पदाधिकारी हैं जो हकीकत से मुंह फेरे हुए हैं और हाईकमान को गलत रिपोर्ट देते रहते हैं। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि बैठक में कोई निर्णय प्रियंका वाड्रा जरूर लेंगी यदि कोई विचार नहीं होता है तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की राह बहुत मुश्किल में होगी।

संबंधित समाचार