लखनऊ: विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित का बेतुका बयान बना चर्चा का विषय
लखनऊ। विधानसभा अध्यक्ष एवं उन्नाव जिले से विधायक हृदय नारायण दीक्षित का बेतुका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने महात्मा गांधी से राखी सावंत की तुलना कर दी। इसके बाद उन्होंने अपनी बयान को लेकर हो रही सियासत पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके …
लखनऊ। विधानसभा अध्यक्ष एवं उन्नाव जिले से विधायक हृदय नारायण दीक्षित का बेतुका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने महात्मा गांधी से राखी सावंत की तुलना कर दी। इसके बाद उन्होंने अपनी बयान को लेकर हो रही सियासत पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।
दरअसल, बीते शनिवार को उन्नाव में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि गांधी अखबार पढ़ा करते थे। कम कपड़े पहनते थे, धोती ओढ़ते थे, गांधी को देश ने बापू कहा। उन्होंने आगे कहा कि अगर कपड़े उतारने से कोई महान बन जाता तो राखी सावंत महान बन जातीं। इसको लेकर जब विपक्षी पार्टी हृदय नारायण दीक्षित पर निशाना साधा तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कुछ लोगों की ओर से वीडियो को गलत तरीके से प्रसारित करने की बात कही गई है। उन्होंने ट्वीट कर स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर कुछ मित्र मेरे भाषण के एक वीडियो के अंश को अन्यथा अर्थों के संकेत के साथ प्रसारित कर रहे हैं।
वास्तव में यह उन्नाव के प्रबुद्ध सम्मेलन में मेरे भाषण का अंश है। जिसमें संचालक ने मेरा परिचय देते हुए मुझे प्रबुद्ध लेखक बताया था। उन्होंने कहा कि मैंने इसी बिंदु से बात आगे बढ़ाते हुए कहा था कि कुछ पुस्तकों और लेखों के लिखने से ही कोई प्रबुद्ध नहीं हो जाता। महात्मा गांधी कम कपड़े पहनते थे। देश में उन्हें बापू कहा, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं राखी सावंत भी गांधी हो जाएंगी। इसका किसी ने वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
इसपर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने बताया कि भाजपा सत्ता के नशे में चूर हैं। यह संगठन अंदर तक कितना टूट गया कि अब तो प्रबुद्ध सम्मेलन के नाम पर बुजुर्ग नेताओं को राखी सावंत के कम कपड़े उनकी जेहन में कैद याद आ रहे हैं। मंच पर दो महिला नेत्री भी बैठी हुई हैं, उसके बावजूद जुबान फिसल रही है। यह भाजपा हताश हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष का महात्मा गांधी को लेकर दिया गया बयान हताशा को दर्शाता है। उन्हें समझना चाहिए कि वह कालखंड दूसरा था, उस समय लोगों के पास खाने और पहनने की मजबूरी थी। उन्होंने सलाह दी कि दीक्षित को गांधी की आटोबॉयोग्राफी और डिस्कवरी ऑफ इंडिया पढ़े, तो उन्हें मालूम चल जाएगा गांधी ने आधा वस्त्र क्यों त्यागा था।
