बड़ा खुलासा: 13 सितम्बर को ही आत्महत्या करना चाहते थे महंत नरेंद्र गिरि, जानें क्यों

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लखनऊ। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर खुलासा हुआ है कि वे वीडियो वायरल होने की बदनामी के डर से 13 सितम्बर को ही आत्महत्या करने वाले थे। उनके 11 पन्नों में लिखे सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके …

लखनऊ। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर खुलासा हुआ है कि वे वीडियो वायरल होने की बदनामी के डर से 13 सितम्बर को ही आत्महत्या करने वाले थे। उनके 11 पन्नों में लिखे सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को आत्महत्या का जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही ये भी लिखा है कि एक महिला से जोड़कर उनका वीडियो वायरल किए जाने का धमकी दी जा रही थी। इसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने बाघंबरी गद्दी मठ का उत्तराधिकारी बलबीर को घोषित किया है। साथ ही अपने प्रिय शिष्यों के नाम वसीयत भी की है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य आनंद गिरि की प्रताड़ना से तंग आकर 13 सितंबर को भी आत्महत्या का मन बनाया था। हालांकि आत्महत्या के लिए वह हिम्मत नहीं जुटा सके। जिसके बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया था। हालांकि बीते काफी दिनों से उन्हें जानकारी मिल रही थी कि उनका शिष्य आनंद गिरि उन्हें बदनाम करने के लिए किसी महिला या युवती के साथ उनकी फोटो जोड़कर वायरल करने वाला है। लिहाजा बदनामी के डर से उन्होंने यह कदम उठाया।

दरअसल उनके शिष्य आनंद गिरि ने उन्हें बदनाम करने की धमकी दी थी। आत्महत्या के पहले 11 पन्नों का सुसाइट नोट नरेन्द्र गिरि ने लिखा है। उन्होंने प्रयागराज के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की गुहार की है। सुसाइट नोट में उन्होंने आनंद गिरि पर एक ऑडिया कैसेट भी वायरल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब भी मैं एकांत में होता हूं तो मर जाने का मन करता है इसीलिए वह यह कदम उठा रहा हूं। साथ ही उन्होंने मंदिर व मठ से जुड़े सभी पदाधिकारियों को बलवीर गिरि को पूरा सहयोग देने का अनुरोध भी किया है। अंत में नोट में लिखा है कि महंत रविंद्र पुरी आपने हमेशा मेरा साथ दिया है। मेरे मरने के बाद बलवीर गिरि का भी मेरी ही तरह पूरा ध्यान रखिएगा।

गुरु की समाधि के बगल बने समाधि

अपने नोट में महंत गिरि ने बाघम्बरी पीठ में अपने गुरु की समाधि के पास ही अपने समाधि बनाए जाने की इच्छा जाहिर की है। इसके साथ ही उन्होंने मठ और बंधवा हनुमान मंदिर की कमान अब अपने प्रिय शिष्य बलवीर गिरी को बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी का शव सोमवार देर शाम आश्रम स्थित उनके कमरे में ही संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी के फंदे से लटकता मिला था। जिस कमरे से उनका शव बरामद हुआ है उस कमरे की जांच फॅारेंसिक टीम से कराई जा रही है। कमरे को पुलिस ने सीज भी कर दिया है और मामले की जांच में जुटी है।

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