लखीमपुर-खीरी: बच्चों को कुपोषण से मुक्त करेगी संभव योजना

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लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिले में तमाम प्रयासों के बावजूद कुपोषण की समस्या कम नहीं हो रही है। बीती जून में हुए सर्वे में फिर यह बात सामने आई है। सर्वे में लगभग 14036 कुपोषित और 1185 बच्चे अति कुपोषित मिले हैं। इसके बाद प्रशासन की नींद उड़ गई है। प्रशासन ने बच्चों के कुपोषण के …

लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिले में तमाम प्रयासों के बावजूद कुपोषण की समस्या कम नहीं हो रही है। बीती जून में हुए सर्वे में फिर यह बात सामने आई है। सर्वे में लगभग 14036 कुपोषित और 1185 बच्चे अति कुपोषित मिले हैं। इसके बाद प्रशासन की नींद उड़ गई है। प्रशासन ने बच्चों के कुपोषण के सभी कारणों पर विचार करने के बाद संभव योजना की शुरूआत की है।

इसमें बाल एवं पुष्टाहार विभाग के अलावा स्वास्थ्य आपूर्ति सहित कई विभागों के लगाया जाएगा। इतना नहीं कुपोषण की स्थितियों का पता लगाने तथा उन्हें दूर करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। संभव योजना के जरिए सभी बच्चों को तीन माह में कुपोषण मुक्त करने का लख्य निर्धारित किया है।

बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा शासन की प्राथमिकताओं में हैं। इसके लिए सरकार ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी तमाम योजनाएं शुरू की है। जून में बाल एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में पंद्रह हजार से अधिक बच्चों में कुपोषण की पुष्टि हुई हैं। इसमें लगभग 14,036 बच्चे कुपोषित हैं और 1,185 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में आते है।

इतनी बड़ी संख्या में बच्चों में कुपोषण मिलना प्रशासन के लिए चिंता की बात है। इस बार के सर्वे में 44 बिंदुओं को शामिल किया गया है इसमें मुख्य रूप से इस बात को देखा गया है कि क्या बच्चों के परिवार वालों के पास राशनकार्ड है कि नहीं, परिवार के पास रोजगार है कि नहीं। इन बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।

इन बच्चों की सूची मिलने के बाद प्रशासन कुपोषण मिटाने के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है। डीएम अरविंद चैरसिया ने बाल एवं पुष्टाहार अधिकारी, स्वास्थ्य, पंचायत राज विभाग और उद्यान अधिकारी सहित उन सभी 40 विभागों को प़त्र भेजकर उन्हें योजनाओं से संतृप्त करने को कहा है।

जैसे यदि परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है तो उनका राशन कार्ड बनाया जाए, यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार है तो उसे तत्काल स्वास्थ्य लाभ दिया जाए और यदि परिवार के पास कोई रोजगार नहीं है तो मनरेगा के तहत उसे काम दिलाया जाए। तथा इन कारणों का पता लगाया जाए कि कुपोषण के लिए मुख्य जिम्मेदार घटक कौन से हंै। साथ ही बाल एवं पुष्टाहार विभाग इन कुपोषित बच्चों के लिए नियमित पुष्टाहार देने की व्यवस्था करेगा।

अधिकारी लेंगे दस-दस बच्चों की जिम्मेदारी
1185 अति कुपोषित बच्चों के लिए जिले के 115 अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। यह अधिकारी इन बच्चों के घर जाएंगे उनकी स्थिति का आकलन करेंगे। एक तरह से इन बच्चों को गोद लेने जैसी जिम्मेदारी उठाएंगे। यह अधिकारी देखेंगे कि बच्चों में कुपोषण किस वजह से है बच्चों का कुपोषण मिटाने के साथ उस वजह का निस्तारण भी कराएंगे जिससे बच्चे कुपोषण का शिकार हुए है। इतना ही नहीं यह अधिकारी अन्य विभागों की योजनाओं से संबंधित परिवारों को संतृप्त कराएंगे। इसकी नियमित मानीटरिंग करेंगे और इसकी सूचना डीएम को देते रहेंगे।

वजन और लंबाई के आधार पर चिन्हत हुए बच्चे
डब्ल्यूएचओ के मानक है उसके अनुसार किसी स्वस्थ बच्चे की लंबाई और उसका वजन उसी अनुमात में होना चाहिए। उसी चार्ट से लंबाई तथा वजन को आधार बनाकर कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। सभी आंगनबाड़ी कार्यालयों पर वजन नापने की मशीन और लंबाई नापने के यंत्र है। कुपोषित बच्चों की संख्या की जानकारी शासन को भेजी गई है।

शुरू हो गया है योजना पर काम
इस माह से योजना पर काम शुरू करा दिया गया है। डीएम स्वयं योजना की मानीटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। कि हर हाल में तीन माह के अंदर कुपोषण मिटाया जाए। बाल विकास विभाग भी अपने स्तर से कार्य कर रहा है। तीन महीने में सभी बच्चों को पोषित करने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। -सुनील कुमार श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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