लखनऊ: अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं राजधानी के दर्जनों इंटर कालेज
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर राजधानी में संचालित एक दर्जन से अधिक विद्यालय ऐसे हैं जो जर्जर अवस्था में हैं। राजकीय निशातगंज इंटर कॉलेज, हरीचंद इंटर कॉलेज, लालबाग स्थित लखनऊ इंटर कॉलेज, हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज ये व शिक्षण संस्थान हैं जो अपनी बदहाली पर आंसू बहाने के लिए मजबूर हैं। समय …
लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर राजधानी में संचालित एक दर्जन से अधिक विद्यालय ऐसे हैं जो जर्जर अवस्था में हैं। राजकीय निशातगंज इंटर कॉलेज, हरीचंद इंटर कॉलेज, लालबाग स्थित लखनऊ इंटर कॉलेज, हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज ये व शिक्षण संस्थान हैं जो अपनी बदहाली पर आंसू बहाने के लिए मजबूर हैं। समय रहते अगर ध्यान नहीं दिया गया ये कॉलेज खंडहर में तब्दील हो जायेंगे। शताब्दी की ओर से बढ़ रहे इन विद्यालयों ने कई कवियों, कई नेता मंत्री दिए हैं, बावजूद इन कॉलेजों को सरकार की ओर से सवांरने के लिए प्रयास नहीं किया गया।
कॉलेजों की छतों की हालत ऐसी कि कभी भी ढह जाएं। यहां पढ़ने वाले बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल आते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जिन कॉलेजों की हम बात कर रहे हैं यहां कभी भी जीजीआईसी नरही जैसा हादसा हो सकता है। हालांकि प्रबंधन समिति की ओर से संचालित विद्यालयों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि फीस वसूल नहीं सकते और सरकार की तरफ से ग्रांट मिलने का भी प्रावधान नहीं है। वहीं विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी कोई खास पहल नहीं की है। हालांकि अभी हाल ही में विभाग ने सिर्फ तीन जर्जर स्कूलों के नाम शासन को भेजे हैं।
ये कॉलेज गरीबों के लिए हैं वरदान
शहर अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में फीस हर साल लाखों में हैं, अगर बच्चा इनके यहां पढ़ता है तो मोटी फीस चुकानी होती है। वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग के इंटर कॉलेजों में गरीब से गरीब बच्चा इंटरमीडिएट तक आसानी से पढ़ जाता है। लेकिन विद्यालयों का अस्तित्व ही खतरे आ गया है तो अब कैसे बच्चे पढ़ पायेंगे।
विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नहीं है कमी
राजकीय निशातगंज इंटर कॉलेज के शिक्षक बताते हैं कि किसी भी माध्यमिक कॉलेज में योग्य शिक्षकों की कमी नहीं है, लेकिन विद्यालय भवन दुरस्त रहे, लैब, लाइब्रेरी के रखरखाव की व्यवस्था ठीक हो, समय-समय पर बिल्डिंग की मरम्मत होती रहे तो विद्यालय जर्जर अवस्था में जाने से बच जायेंगे।
खंडहर में तब्दील हो रहा निशातगंज इंटर कॉलेज
राजकीय निशातगंज इंटर कॉलेज अपने में एक एतिहसिक है। अंग्रेजी शासन में ये जेल हुआ करता था। उसके बाद यहां पर कॉलेज का संचालन शुरू हुआ, यहां मौजूदा समय में करीब 700 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन विद्यालय के अधिकांश भवन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
तीन साल पहले छत ढही, आज तक सही नहीं
सदर स्थित हरीचंद इंटर कॉलेज को मान्यता 1966 में मिली। तब से आज तक इस स्कूल की मरम्मत तो दूर रंग-रोगन तक नहीं हुआ। भवन इतना जर्जर है कि तीन साल पहले ही स्टाफ रूम की छत ढह गई थी। पांच कमरे इतने खस्ताहाल हैं कि उन्हें बंद कर दिया गया है। प्रयोगशाला में तो पिछले 25 वर्षों से ताला लगा है।
दो मंजिला स्कूल, पहली मंजिल पूरी तरह से बंद
लालबाग स्थित लखनऊ इंटरमीडिएट स्कूल करीब 82 साल पुराना है। दो मंजिला इस स्कूल में पहली मंजिल के सभी कमरे खस्ताहाल होने के चलते बंद कर दिए गए हैं। सभी प्रयोगशालाएं पहली मंजिल पर ही हुआ करती थीं। कई वर्ष पहले छत ढहने के बाद से प्रयोगशालाओं समेत सभी कमरों में ताला जड़ दिया गया।
इनकी हालत भी बहुत अच्छी नहीं
हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय का प्राइमरी सेक्शन जर्जर होने की वजह से बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने इसे जर्जर घोषित कराने का काफी प्रयास किया। न्यायालय की शरण में भी गए, लेकिन विभाग ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं ली। इस विद्यालय की नींव महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में रखी थी।
सरकार करे पहल
इस बारे में माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशीय मंत्री डॉ आरपी मिश्रा कहते हैं कि सरकार पहल करनी चाहिए ऐसे विद्यालयों को सवांरने के लिए। उन्होंने कहा कि ये विद्यालय अगर बचे रहेंगे तो हर गरीब बच्चा भी शिक्षित होता रहेगा।
