रायबरेली: कमीशन के खेल में बाहर से दवा लेने को मजबूर मरीज, जानें मामला
रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर उपचार दिलाने के दावे कर रहा है। लेकिन कमीशन का खेल मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सीएचसी हो या पीएचसी बाहर से दवा लिखने का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। अभी पांच दिन पहले सीएचसी लालगंज और सरेनी में लाखों की …
रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर उपचार दिलाने के दावे कर रहा है। लेकिन कमीशन का खेल मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सीएचसी हो या पीएचसी बाहर से दवा लिखने का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। अभी पांच दिन पहले सीएचसी लालगंज और सरेनी में लाखों की दवा कूड़े में डंप मिली थीं। जिस पर जिम्मेदार आंख बंद किए हुए है। अब डलमऊ सीएचसी का ही हाल देखिए। यहां पर हर दिन करीब 200 से 250 मरीज ओपीडी में अपना उपचार कराने के लिए पंजीकरण कराते हैं।
इन दिनों बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी अस्पतालों में गरीब ग्रामीण उपचार कराने के लिए आते हैं, जिन्हें सरकारी दवाएं न देकर अधिक कमीशन की दवाएं चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही हैं। वहीं जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या इस समय बढ़ी हुई है और मरीजों को सरकारी दवा नहीं मिल रही है। तीन दिन एक महिला अपने बच्चे के इलाज को लेकर भटकती रही लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।
मामले ने जब तूल पकड़ा तो इलाज की सुविधा दी गई। बताते हैं कि सीएचसी के चिकित्सक ही लोगों के मन में यह धारणा पैदा कर रहे हैं कि सरकारी दवाएं कम असर दायक है। बाहर की दवाओं में शीघ्र लाभ मिलता है शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए मरीज भी महंगी दवाओं को खरीदने के लिए बाध्य हो रहे हैं। असल में डॉक्टर साहब मरीजों के स्वास्थ्य की चिंता कम कर अपने कमीशन की चिंता ज्यादा करते हैं जिसके लिए वह बाहर से दवाएं लिख रहे हैं।
क्या कहते जिम्मेदार
डलमऊ सीएससी प्रभारी नवीन कुमार ने बताया कि बाहर से दवाएं लिखे जाने का मामला प्रकाश में नहीं है । जांच कराई जाएगी दोषी चिकित्सकों से स्पष्टीकरण दिया जाएगा व कार्यवाही की जाएगी
