बरेली: कई कूड़ा गाड़ियों में 100 लीटर से भी ज्यादा तेल का खर्चा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों में तेल खपत की जीपीएस से जांच के बाद कई वाहनों में दो से ढाई महीने में 100 लीटर तो कुछ में उससे भी ज्यादा के ईंधन के फुंकने का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अशोक कुमार की ओर से …

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की कूड़ा गाड़ियों में तेल खपत की जीपीएस से जांच के बाद कई वाहनों में दो से ढाई महीने में 100 लीटर तो कुछ में उससे भी ज्यादा के ईंधन के फुंकने का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अशोक कुमार की ओर से 22 कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा चुका है। इसमें कई लोगों ने जवाब नहीं दिए हैं।

जबकि नगर निगम के अधिकारी यह कह चुके हैं कि स्पष्टीकरण न देने वाले कर्मचारियों के वेतन रोकने और कटौती की कार्रवाई को हर हाल में किया जाएगा। नगर निगम के कर्मचारी संघ के पदाधिकारी इस प्रकरण के फंसे कर्मचारियों के पक्ष में गुरुवार को नगर आयुक्त से मिले लेकिन उन्हें फिलहाल वहां से भी राहत नहीं मिली है। इससे यह मामला सुलझता नहीं दिखा रहा है।

नगर निगम की गाड़ियों से कूड़ा लिफ्टिंग में तेल का ‘खेल’ पकड़े जाने के बाद अब नगर स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारियों के बीच ठनी हुई है। इस मामले में फंसे कर्मचारियों के पक्ष में गुरुवार को नगर निगम के कई कर्मचारी नेता जयपाल सिंह पटेल, जितेंद्र कुमार, ठाकुर महक सिंह, राजेश कुमार, महावीर सिंह आदि नगर आयुक्त अभिषेक आनंद से मिले लेकिन नगर आयुक्त ने यह साफ कह दिया है कि गाड़ियों में सौ लीटर और उससे भी ज्यादा तेल का खपत होना मामूली बात नहीं है।

कर्मचारी नेताओं का कहना था कि कई बार गाड़ियों के जाम में फंसने या किसी और वजह से वह उतना एवरेज नहीं दे पातीं, जितना जीपीएस के माध्यम से निर्धारित किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन से कटौती कर हर्जाना लिया जाना ठीक नहीं है। कर्मचारी नेताओं की दलील के बावजूद नगर आयुक्त इस प्रकरण में फंसे कर्मचारियों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है।

हर महीने 50 से 60 लाख तक होता है तेल का खर्च
नगर निगम की 80 वार्डों में कूड़ा लिफ्टिंग के लिए करीब 250 छोटी-बड़ी गाड़ियां हर दिन सड़कों पर दौड़ लगाती है। ये गाड़ियां हर महीने 50 से 60 लाख रुपये तक का ईंधन फूंक देती है। नगर निगम के पास कोई वर्कशॉप न होने से तमाम गाड़ियों का एवरेज ठीक नहीं रहता है। साथ ही उनकी मरम्मत भी समय से नहीं हो पाती।

संबंधित समाचार