बरेली: मंहगाई ने कमर तोड़ी, कुदरत की मार से किसान बर्बाद

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बरेली, अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस से लेकर खाद्य पदार्थों के दामों की महंगाई से त्रस्त किसानों पर कुदरत की मार भी पड़ गयी। छह माह तक जिस धान की फसल को जमा-पूंजी से लेकर साहूकारों से कर्ज लेकर सींचकर तैयार किया। जब उसे घर ले जाने की बारी आयी तो कुदरत ने ऐसा खेल …

बरेली, अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस से लेकर खाद्य पदार्थों के दामों की महंगाई से त्रस्त किसानों पर कुदरत की मार भी पड़ गयी। छह माह तक जिस धान की फसल को जमा-पूंजी से लेकर साहूकारों से कर्ज लेकर सींचकर तैयार किया। जब उसे घर ले जाने की बारी आयी तो कुदरत ने ऐसा खेल रचा कि धान की फसल खेतों में ही सड़ने की स्थिति में आ गयी। दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों की कमर ही नहीं तोड़ी बल्कि उनकी उम्मीदों को भी चकनाचूर कर दिया।

खेतों की स्थिति तालाब की तरह हो गयी। धान की पुरी उसमें तैरती नजर आ रही है। हजारों बीघा धान की फसल बर्बाद हो गयी। इस झटके ने किसानों के परिवार में होने वाली शादियों पर भी असर डाला है। जिन किसानों ने धान को बेचकर परिवार के जरूरी कामकाज के साथ शादी के लिए जो तैयारी की थी। उन तैयारियों पर बारिश ने पानी फेर दिया। इस बेमौसम बारिश में हजारों किसानों के साथ आम लोगों की भी दिक्कतें बढ़ा दी हैं। धान की उपज कम होने से इस बार धान बाजार में महंगा भी रहेगा। जिसका असर आम लोगों की जेब पर ही पड़ेगा। किसानों ने बर्बाद हुई फसल पर सरकार से मुआवजे की मांग की है। वहीं, बहेड़ी मंडी समिति परिसर के सामने एक राइस मिल में लगीं धान की करीब 800 बोरियां भीग गयीं। इससे मिल मालिक को झटका लगा है।

सभी एसडीएम और तहसीलदारों को किसानों की बर्बाद हुई फसलों का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। बारिश से किसानों को खासा नुकसान पहुंचा है। बारिश ने कई तरह से परेशान किया है। रिपोर्ट आने के बाद मालूम होगा कि जिले में कितने किसानों को नुकसान पहुंचा है।  —नितीश कुमार, जिलाधिकारी

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