अक्टूबर में तीन गुना हुई बरसात, किसान बेहाल, कटा हुआ धान भी भीगकर खराब
लखनऊ। इस बार मानसून ने जहां धान की पैदावार को बेहतर किया, वहीं कटाई के समय अक्टूबर में हुई बरसात ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रदेश में औसतन सामान्य से तीन गुना अधिक बरसात इस महीने में हुई। ऐसे में लाखों हेक्टेयर धान जहां कट नहीं पाया है, वहीं बड़े पैमाने पर …
लखनऊ। इस बार मानसून ने जहां धान की पैदावार को बेहतर किया, वहीं कटाई के समय अक्टूबर में हुई बरसात ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रदेश में औसतन सामान्य से तीन गुना अधिक बरसात इस महीने में हुई। ऐसे में लाखों हेक्टेयर धान जहां कट नहीं पाया है, वहीं बड़े पैमाने पर धान कटने के बाद भीगकर भी खराब हुआ है।
इस वर्ष मानसून समय से पहले ही आ गया था। शुरूआत से ही अच्छी बरसात होने के कारण धान की खेती किसानों ने खूब की। अच्छी बरसात के कारण फसल भी अच्छी थी। ऐसे में किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अच्छा फायदा होगा, लेकिन सितंबर से अक्टूबर तक रह-रह कर जो बरसात हुई, उसने अगैती खेती करने वाले किसानों के साथ ही मध्यम खेती वालों को भी खासा नुकसान पहुंचाया। धान की फसल सितंबर से ही कटना शुरू हो जाती है, लेकिन अक्टूबर माह में अभी तक अनेक जिलों में निचले क्षेत्रों में खेतों में पानी भरा हुआ है।
पूरे सीजन में औसत से ज्यादा बरसात
इस वर्ष जून से सितंबर तक कुल 748.8 मिमी बरसात पूरे प्रदेश में हुई थी। जबकि इस दौरान प्रदेश में सामान्य वर्षा 790.2 मिमी होती है। उस मुकाबले हुई बरसात करीब 95 प्रतिशत ही थी, लेकिन अक्टूबर माह में सामान्य से तीन गुना अधिक बरसात हो गई। एक से 24 अक्टूबर तक प्रदेश में कुल औसत वर्षा 87.9 मिमी हुई। जबकि सामान्य वर्षा 30 मिमी ही होती है। इस तरह अक्टूबर से अब तक कुल 836.6 मिमी वर्षा हुई जो सामान्य वर्षा 820.8 मिमी से अधिक है।
भूगर्भ जल को होगा फायदा
इस बार बरसात का सिलसिला जिस तरह से चला, उससे भूर्गभ विज्ञानियों का मानना है कि भूजल स्तर ऊपर आएगा। क्योंकि बरसात जून से लेकर अक्टूबर तक निरंतर रही और बारिश बहुत तेज नहीं हुई। ऐसे में भूगर्भ जल का रिचार्ज हुआ है। जिसका फायदा गर्मियों में नजर आएगा।
