बाप मंत्री, बेटा सांसद, दूसरा पुत्र बनना चाहता है एमएलसी : सीएम योगी

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी से हाथ मिला लेने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा प्रहार किया। भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बाप मंत्री, एक बेटा सांसद और दूसरा बेटा एमएलसी बनना चाहता है। ऐसे राजनीतिक ब्लैकमेलरों की दुकान बंद करनी होगी। मुख्यमंत्री ने रविवार को इंदिरा गांधी …

लखनऊ। समाजवादी पार्टी से हाथ मिला लेने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा प्रहार किया। भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बाप मंत्री, एक बेटा सांसद और दूसरा बेटा एमएलसी बनना चाहता है। ऐसे राजनीतिक ब्लैकमेलरों की दुकान बंद करनी होगी। मुख्यमंत्री ने रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान और विश्वेश्वरैया भवन में आयोजित दो सम्मेलनों को संबोधित किया।

इसमें राजभर समाज के सम्मेलन में उन्होंने आगे कहा कि मुहम्मद गोरी और आक्रांता गाजी के अनुयायी वोट बैंक के भय से हिन्दू रक्षक महाराजा सुहेलदेव के नाम से डरते हैं। इनको भय है कि सुहेलदेव का स्मारक बनने के बाद लोग गाजी को भूल जाएंगे और जनता राजनीतिक ब्लैकमेलरों को कूड़े में फेंक देगी। इसी भय से वह राष्ट्र रक्षक सुहेलदेव के स्मारक का अप्रत्यक्ष रूप से विरोध कर रहे थे।

दूसरे सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत क्या था और 2014 के बाद भारत आज कहां है, यह सबके सामने है। 2014 के पहले देश में रोज एक नया घोटाला आता था और अब जनकल्याण-विकास की ही बात होती है। अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल को छोड़ दें तो भारत और भारतीयता के बारे में कोई चर्चा नहीं करता था।

इन सम्मेलनों को कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन, केन्द्रीय मंत्री रामेश्वर तेली, सांसद संगम लाल गुप्ता, पूर्व सांसद राम नारायण साहू, राज्य पिछड़ा आयोग के सदस्य जगदीश साहू, मेयर नूतन राठौर, मंत्री अनिल राजभर, राज्यसभा सदस्य सकलदीप राजभर, विधायक विजय राजभर, पूर्व सांसद बब्बन राजभर, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप ने भी संबोधित किया।

’सपा, बसपा और कांग्रेस-खानदान तक सीमित’

मुख्यमंत्री ने कहा सपा, बसपा और कांग्रेस खानदान के विकास तक सीमित हैं। पहले विपक्षी दलों के नेताओं की हवेली बनती थी। आज गरीब की हवेली बन रही है। पहले बिजली कैद कर ली जाती थी, आज सबको मिल रही है। भाजपा और अन्य दलों में यही फर्क है।

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