बरेली: दिन में जाम से राहत लेकिन शाम आते-आते जाम से जूझे राहगीर
बरेली, अमृत विचार। दिवाली सप्ताह के पहले दिन ही ट्रैफिक व्यवस्थाएं फेल हो गईं। जहां एक तरफ शहर के चौराहे जाम की चपेट में नजर आए वहीं शाम होते-होते बाजारों में जाम की वजह से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। मुख्य बाजार तक पहुंचने के रास्ते में तैनात ट्रैफिक व सिविल पुलिसकर्मी भी वाहनों …
बरेली, अमृत विचार। दिवाली सप्ताह के पहले दिन ही ट्रैफिक व्यवस्थाएं फेल हो गईं। जहां एक तरफ शहर के चौराहे जाम की चपेट में नजर आए वहीं शाम होते-होते बाजारों में जाम की वजह से राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। मुख्य बाजार तक पहुंचने के रास्ते में तैनात ट्रैफिक व सिविल पुलिसकर्मी भी वाहनों की आवाजाही को नहीं रोक सके। भीड़भाड़ ऊपर से जाम ने खरीददारों की परेशानी बढ़ा दी।
त्योहार के मौके पर शहर में जाम की समस्या से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना पहले दिन ही फेल होती दिखाई दी। शहर के मुख्य बाजार कुतुबखाना, बड़ा बाजार और सिविल लाइंस पर जाम की बड़ी समस्या दिखाई दी। एक दिन पहले ही ट्रैफिक विभाग द्वारा इस बाजार तक पहुंचने के लिए कोतवाली, कुहाड़ापीर चौकी, चौपुला रोड पर खलील तिराहा व अन्य जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी। पांच दिनों के लिए रास्ता बंद करने का मुख्य उद्देश्य चार पहिया वाहन, ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा की आवाजाही को बाजार में पूरी तरह से रोकने के लिए था।
इस बंदी का असर दिन में तो दिखाई दिया लेकिन शाम होते-होते ट्रैफिक विभाग की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। वहीं दिन के समय पटेल चौक से कुतुबखाना मार्ग, बरेली कॉलेज मार्ग, चौपुला मार्ग और चौकी चौराहा मार्ग पर वाहनों का भारी जाम लगा रहा। इसके अलावा दोपहर के बाद पुलिस कर्मियों की नजरों से बचते हुए वाहनों की आवाजाही बाजार की तरफ होती रही और धीमे-धीमे जाम की स्थिति बनती चली गई। वहीं देर शाम बाजार में भीड़भाड़ बढ़ने के साथ-साथ वाहनों की आवाजाही भी बढ़ने लगी।
आलम यह हो गया कि बढ़ती भीड़ और वाहनों की वजह से लगे जाम की वजह से पुलिस व ट्रैफिक कर्मियों के भी हाथ-पांव फूल गए। इसके चलते खरीददारी करने या किन्हीं अन्य कारणों से कुतुबखाना, बड़ा बाजार व सिविल लाइंस की ओर जाने वाले राहगीरों को जाम की भारी परेशानी से होकर गुजरना पड़ा।
वहीं नगर निगम द्वारा मंगलवार को भी वाहनों की पार्किंग को लेकर दी जाने वाली कार्ययोजना का कुछ पता नहीं चला और न ही किला की ओर से आने-जाने वाले माल ढोने वाले रिक्शा व अन्य वाहनों की आवाजाही के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई। इसकी वजह से भी कुतुबखाना चौराहे व बाजार में जाम की किल्लत बनी रही।
