बरेली: निजी अस्पताल में मरीज की मौत पर हंगामा

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बरेली, अमृत विचार। ब्रेन हेमरेज की शिकायत पर भर्ती मरीज की उपचार के दौरान निजी अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल द्वारा उपचार के एवज में बतौर परिजनों से फीस लेने और मरीज का शव नहीं देने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि कुछ घंटे बाद अस्पताल प्रशासन ने फीस की रकम कम कर …

बरेली, अमृत विचार। ब्रेन हेमरेज की शिकायत पर भर्ती मरीज की उपचार के दौरान निजी अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल द्वारा उपचार के एवज में बतौर परिजनों से फीस लेने और मरीज का शव नहीं देने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि कुछ घंटे बाद अस्पताल प्रशासन ने फीस की रकम कम कर परिजनों को शव सौंप दिया।

बहेड़ी निवासी पीडब्ल्यूडी कर्मी अनिल चंद्रा को बीते 30 अक्टूबर को अचानक तबीयत खराब होने पर मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि इन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया है, मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन करना होगा। डॉक्टरों ने परिजनों की सहमति पर मरीज का ऑपरेशन किया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन से पूर्व डॉक्टरों द्वारा मरीज के ठीक होने की बात कही जा रही थी लेकिन शनिवार को दिन में मरीज ने दम तोड़ दिया।

आरोप है कि इसके बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतक का शव अपने कब्जे में लेकर परिजनों पर पहले पूरी बकाया शुल्क जमा करने को दबाव बनाया जाने लगा। परिजनों ने इस संबंध में अस्पताल के मैनेजर हर्षुल यादव से भी पूरी फीस माफ करने का आग्रह किया लेकिन मैनेजर ने मरीज के उपचार में लगे डॉक्टर, स्टॉफ कर्मी और आईसीयू के खर्चों को हवाला देते हुए फीस जमा करने की बात कही।

दो बेटियों के सिर उठा पिता का साया
अस्पताल में अपने पिता की मौत की खबर सुन कर गम मे डूबी बेटियों की तो मानों दुनिया ही उजड़ गई हो। मृतक अनिल की दोनों बेटियां 22 वर्षीय शिवांगी और करीब 18 वर्षीय कुमुद चंद्रा जमीन पर माथा पीट कर बिलखती रहीं। बेटियों की दशा देख कर मौजूद सभी की आंखे नम हो गईं। वहीं पति की मौत से पत्नी मीरा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों से लिपट कर वह बार बार पति को याद कर बदहवास हो रही थीं।

अस्पताल में पिता की मृत्यु के घंटो बाद भी शव नहीं दिया जा रहा है। हमारी आर्थिक स्थिति दयनीय है। अस्पताल की लगभग 80 हजार की रकम नहीं चुका सकते। ऐसे में अस्पताल प्रशासन पूरी फीस लेकर शव देने की बात कर रहा है। — शिवांगी, मृतक की बेटी

परिजनों की मांग पर आधे से ज्यादा रकम माफ कर सिर्फ 50 हजार फीस जमा कराई गई है। मरीज का शव परिजनों को सौंप दिया गया है।  –हर्षुल यादव, मैनेजर, मिशन अस्पताल

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