अयोध्या: ईंट निर्माताओं ने वित्त मंत्री से मांगी मोहलत, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
अयोध्या। कोरोना काल से ही परेशान चल रहे ईंट निर्माताओं ने अपनी मुश्किलों का हल निकालने के लिए नया रुख अख्तियार किया है। निर्माता समिति के पदाधिकारियों ने लाल ईटों पर जीएसटी के स्लैब को पहले की तरह करने की मांग को लेकर सोमवार को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी …
अयोध्या। कोरोना काल से ही परेशान चल रहे ईंट निर्माताओं ने अपनी मुश्किलों का हल निकालने के लिए नया रुख अख्तियार किया है। निर्माता समिति के पदाधिकारियों ने लाल ईटों पर जीएसटी के स्लैब को पहले की तरह करने की मांग को लेकर सोमवार को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। साथ ही प्रस्ताव को जनविरोधी बताते हुए आगामी दो सालों तक ईंट भट्ठों को जीएसटी मुक्त करने की आवाज उठाई।
उत्तर प्रदेश ईट निर्माता समिति द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बारे में प्रदेश अध्यक्ष अतुल कुमार सिंह ने बताया की सरकार भली भांति जान रही है कि विगत दो सालों से कोरोना महामारी के कारण जनमानस प्रभावित है। जन साधारण के निर्माण की मूलभूत आवश्यकता लाल ईंटो पर जीएसटी की दर बढ़ाने का प्रस्ताव जन विरोधी है। ईंट भट्ठों के लिए जीएसटी में वर्तमान में डेढ़ करोड़ के लेन देन तक समाधान योजना है, जिसपर 1 प्रतिशत कर है।
काउंसिल की 45वीं बैठक में बिना आईटीसी लिए कर की दर 6 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव है और सामान्य रूप से ईंट पर कर दर 5 प्रतिशत हैं, जिसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव हैं। इस जनविरोधी प्रस्ताव को निरस्त किया जाए और आगामी 2 सीजन वर्ष के लिए ईट भट्ठों को जीएसटी से मुक्त किया जाए। वर्तमान समय में मोरंग, गिट्टी, बालू, सीमेंट, सरिया इत्यादि महंगा है, जिसके कारण आम जनमानस परेशान दिख रहा है।
नए प्रस्तावित जीएसटी के स्लैब में हो रही वृद्धि और कोयले का मूल्य जो कुछ दिनो पूर्व में सात हजार प्रति टन था। वो अब 22 हजार प्रति टन हो गया है, जिसके कारण ईंटों के मूल्यों में भी वृद्धि होने की पूरी संभावना है, जिससे प्रधानमंत्री का सपना सबका घर हो अपना की सोच धरी की धरी रह जाएगी। सभी ईंट निर्माता व आम जनमानस की मांग हैं कि लाल ईंटों पर जीएसटी का स्लैब पूर्व की तरह ही रखा जाए।
