बरेली: कचहरी की सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग, दिक्कतें बढ़ीं

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बरेली, अमृत विचार। कचहरी, कलेक्ट्रेट चौराहा, तहसील गेट के आसपास और रजिस्ट्री दफ्तर जाने वाली सड़क पर दिनभर बेतरतीब वाहन खड़े रहते हैं। इससे सड़कों पर रोज जाम की स्थिति बनी रहती है। पूर्व में जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए दो कार पार्किंग स्मार्ट सिटी से बनवाने को सर्वे भी हुआ था …

बरेली, अमृत विचार। कचहरी, कलेक्ट्रेट चौराहा, तहसील गेट के आसपास और रजिस्ट्री दफ्तर जाने वाली सड़क पर दिनभर बेतरतीब वाहन खड़े रहते हैं। इससे सड़कों पर रोज जाम की स्थिति बनी रहती है। पूर्व में जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए दो कार पार्किंग स्मार्ट सिटी से बनवाने को सर्वे भी हुआ था लेकिन कार पार्किंग की निविदा निरस्त हो गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाए। सबसे ज्यादा खराब स्थिति आबकारी कार्यालय के बगल से न्यायालय के पूर्वी गेट को जा रही सड़क की है। इस सड़क पर दोनों तरफ से सैकड़ों की संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। निकलने के लिए दिनभर लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है।

कार-बाइक पार्किंग न होने से गहराती जाम की समस्या का मामला अजय शर्मा एडवोकेट ने जोरशोर से उठाया है। समस्या को जन आंदोलन बनाने के लिए अजय शर्मा पिछले 10 दिनों से अधिवक्ताओं का सहयोग लेने के लिए उनके हस्ताक्षर करा रहे हैं। उन्होंने 500 से ज्यादा अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर कराए। मंगलवार को अजय शर्मा कचहरी के अधिवक्ता देवेंद्र सिंह, सुरेंद्र यादव, जितेंद्र कुमार, नाहर खान, रवींद्र भारती, नीटू सिंह, लेखराज गंगवार के साथ जिलाधिकारी से मिले। उन्हें हस्ताक्षरयुक्त पेजों संग शिकायती पत्र सौंपा।

अधिवक्ताओं ने डीएम को बताया कि बरेली शहर में अत्यधिक गाड़ियां होने से जाम की समस्या बनी हुई है। कचहरी परिसर के अलावा कलेक्ट्रेट चौराहा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया गेट, तहसील सदर गेट, रजिस्ट्री दफ्तर वाली सड़क आदि सड़कों पर सैकड़ों वाहन खड़े रहते हैं। सड़क पर घेरकर खड़े वाहनों की वजह से यहां आने-जाने वाले राहगीरों को दिक्कतें होती हैं। बाइक-कार की पार्किंग न होने से लोगों की सड़क किनारे वाहन खड़ा करने की मजबूरी भी है। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से बाइक-कार पार्किंग बनवाने की मांग उठाई।

एक-एक अधिवक्ता के पास जाकर कराए हस्ताक्षर
अजय शर्मा एडवोकेट ने बताया कि कई बार जाम का मुद्दा उठाया। किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, इसलिए इसे जन आंदोलन का रूप देने के लिए वह एक-एक अधिवक्ता के पास गए और उनके हस्ताक्षर कराए। सड़कों किनारे बेतरतीब वाहनों के खड़े रहने से अधिवक्ताओं को भी नुकसान होता है। उन्हें दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।

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