स्वच्छता रैंकिंग में फिसली बरेली, चार अंक और नीचे लुढ़की

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बरेली, अमृत विचार। अफसरों के दावों के उलट स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में बरेली शहर ऊपर के बजाय और निचले पायदान पर पहुंच गया है। शनिवार को स्वच्छता रैकिंग 2021 के नतीजे चौंकाने वाले रहे। बरेली की रैकिंग पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर 149 थी, जबकि इस बार यह 4 अंक और नीचे लुढ़ककर 153 …

बरेली, अमृत विचार। अफसरों के दावों के उलट स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में बरेली शहर ऊपर के बजाय और निचले पायदान पर पहुंच गया है। शनिवार को स्वच्छता रैकिंग 2021 के नतीजे चौंकाने वाले रहे। बरेली की रैकिंग पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर 149 थी, जबकि इस बार यह 4 अंक और नीचे लुढ़ककर 153 पहुंच गई। इससे शहर को स्वच्छ बनाने की मुहिम की भी हकीकत सामने आ गई। प्रदेश स्तर पर रैकिंग नतीजों की बात करें तो 13 नगर निगमों में बरेली को छठवां स्थान प्राप्त हुआ है।

स्वच्छता रैकिंग में बरेली का प्रदर्शन बेहद खराब रहने के पीछे सफाई की बदहाल सफाई व्यवस्था, कूड़ा प्रबंधन न होना, सॉलिड वेस्ट प्लांट का संचालन न हो पाना और नागरिकों का ऑनलाइन फीडबैक को लेकर दिलचस्पी न लिया जाना बड़ी वजह बताई जा रही है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना था कि इस वर्ष स्वच्छता रैंकिंग में बरेली को 100 से भी नीचे ले जाने का लक्ष्य है। उसके बाद इसे 50 से भी नीचे ले जाने का लक्ष्य था, लेकिन यह दावा हवाई साबित हुआ।

बरेली शहर का प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले और ज्यादा फिसड्डी साबित हो गया। पिछले दो साल की रैकिंग के नतीजे बताते हैं कि बरेली स्वच्छता रैंकिंग में कोई बेहतर स्थिति में नहीं पहुंच पा रहा है। सिटीजन फीडबैक में भी बरेली के लोगों ने कोई खास दिलचस्पी नहीं ली है। शहर की 2011 जनगणना के अनुसार आबादी नौ लाख से भी ऊपर है, लेकिन इसमें करीब 20 फीसदी लगभग दो लाख लोगों ने ही अपना फीड बैक दिया।

कूड़ा उठान और निस्तारण की बदहाल स्थिति ने डुबोई नैय्या
कूड़ा प्रबंधन की बदहाल स्थिति ने बरेली के प्रदर्शन को बदतर स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया। सर्वेक्षण में सिटीजन फीडबैक के साथ कूड़ा प्रबंधन व निस्तारण की व्यवस्था आदि को लेकर कुल छह हजार अंक निर्धारित हैं, लेकिन इसमें भी शहर को केवल 3200 नंबर ही प्राप्त हुए थे। शहर में कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण की स्थिति पर बात करें तो यहां कूड़ा निस्तारण के लिए अब तक प्लांट चालू नहीं हो सका है। गार्बेज फ्री सिटी के तहत बरेली को शून्य मिला है। कई दिनों तक डस्टबिन से कूड़े को लिफ्टिंग न करने और उसे डलावघर तक न पहुंचाने, कूड़ेदानों की बदहाल स्थिति भी रैकिंग की भी वजह रही।

वर्षों से हो रहा सॉलिड वेस्ट प्लांट और एसटीपी लगने का इंतजार
शहर में स्वच्छता के लिए सॉलिड वेस्ट प्लांट और एसटीपी लगाए जाने का इंतजार वर्षों से किया जा रहा है। करीब डेढ़ दशक से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के संचालन की केवल कोशिश ही चल रही है। इसी तरह में शहर में करीब दो दशक से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगाए जा सके। इससे नालों का पानी सीधे नदियों में मिलने से प्रदूषण हो रहा है। इसके अलावा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की स्थिति खराब है। कूड़ेदानों से कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठता है। शहर में बने सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी खराब है। ओडीएफ का सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद ज्यादातर शौचालय बंद रहने से उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। रैकिंग गिराने में यह वजह भी शामिल रहीं।

पांच साल में कुछ ऐसा रहा है प्रदर्शन

साल                        नतीजा
2021                    153
2020                     149
2019                     117
2018                      322
2017                      298

रैकिंग के नतीजों में ये नंबर थे निर्धारित

  • स्वच्छता सर्वेक्षण के कुल अंक- 6000
  • सिटीजन वाइस व सर्टिफिकेशन के अंक- 1800
  • सर्विस लेवल प्रोग्रेस के अंक- 2400
  • पब्लिक फीडबैक, स्वच्छता एप आदि के अंक-1800

कुछ कमियों की वजह से हम नेशनल लेवल पर पिछड़े हैं लेकिन प्रदेश स्तर पर बरेली का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जो भी कमियां रही हैं, उन्हीं को चिन्हित करके उन्हें ठीक कराने का पूरा फोकस इस साल रहेगा। -अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त

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