सीतापुर: पीएचसी से नदारद रहते हैं चिकित्सक, परिसर बना चारागाह

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सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके के सेवता क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। इस स्वास्थ्य केंद्र में न चिकित्सक आते हैं और नहीं स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारू रूप से चलती हैं। महज नाममात्र एक फार्मासिस्ट आता है, मरीज आते हैं, लेकिन जब स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पाते तो वह रेउसा सीएचसी का रूख करते हैं। इसकी बदहाली …

सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके के सेवता क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। इस स्वास्थ्य केंद्र में न चिकित्सक आते हैं और नहीं स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारू रूप से चलती हैं। महज नाममात्र एक फार्मासिस्ट आता है, मरीज आते हैं, लेकिन जब स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पाते तो वह रेउसा सीएचसी का रूख करते हैं।

इसकी बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर इस स्वास्थ्य केंद्र की हालत चारागाह जैसी है। यहां आसपास लोग कूड़ा डालते हैं। स्वास्थ्य केंद्र परिसर में लोग चराने के लिए अपने जानवर बांध देते हैं। चाहकर भी स्वास्थ्य कर्मी इसका विरोध नहीं कर पाते। सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया था, लेकिन यह विभागीय जिम्मेदारों की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक इस स्वास्थ्य केंद्र पर बने करीब दस वर्ष गुजर गए हैं, लेकिन इलाज के लिए आज भी इलाके के लोगों को रेउसा या प्राइवेट झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिम्मेदार अधिकारियों को लोगों की समस्याएं नहीं दिख रही हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ ग्रामीण इसमें अपने पशु भी बांधते है। मौसम में बदलाव के साथ क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद इस दौरान लोगों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर समय से डॉक्टर नहीं मिलते हैं। अमृत विचार टीम ने पड़ताल की गई, तो अस्पताल में केवल फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार उपस्थित थे। शेष स्वास्थ्य कर्मी व चिकित्सक नदारद थे। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के चलते यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शो-पीस बना हुआ है।

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पीएचसी सेवता में मेडिकल की कोई सेवा नहीं है। पीएचसी में फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार समय से अस्पताल आते हैं। वहीं लैब टैक्नीशियन सुरेंद्र कुमार की कभी-कभी ड्यूटी रेउसा सीएचसी में लग जाती है। इस वजह से दो तीन घंटे रेउसा सीएचसी में ड्यूटी कर फिर पीएचसी सेवता जाते है। तब तक मरीज अस्पताल में बैठकर इतंजार करते रहते हैं। इसके अलावा सेवता निवासी अनुराग शुक्ला, संजय रस्तोगी,  खालिद रजा, भूपेंद्र तिवारी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थिति बहुत ही खराब है। यहां पर न तो कोई भी डॉक्टर समय से आता है और न हीं अन्य स्टाफ। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ फर्मासिस्ट सुरेंद्र कुमार आते हैं, लेकिन लैब टैक्नीशियन आदि अस्पताल समय से नहीं आते है। पीएचसी में कोई भी नर्स की तैनाती नहीं है।

इसके मुख्य गेट के आस-पास कूड़े के ढे़र लगे हुए है। लोगों ने इसके मैदान को खेल ग्राउंड के रूप में तब्दील कर दिया है। वहीं पशुओं को पालने वाले इसे चरागाह के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं यहां पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। इसकी दो तरफ की चहारदीवारी भी गायब हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेवता की जर्जर बाउंड्रीवाल की नए सिरे से मरम्मत व रंगाई-पोताई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव आने पर पीएचसी सेवता की सही से देख-रेख की जायेगी। जिससे ग्रामीण अंचलों के लोगों को 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें।

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