बरेली: तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हिंदी के उपयोग के हो रहे प्रयास

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग शिक्षा मंत्रालय, (उच्चतर शिक्षा विभाग) व अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संकाय एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने ‘यांत्रिकी अभियांत्रिकी, हरित विनिर्माण एवं ऊर्जा संरक्षण में नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी शब्दावली के अनुप्रयोग’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की। कार्यक्रम का आरंभ यांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम के …

बरेली, अमृत विचार। वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग शिक्षा मंत्रालय, (उच्चतर शिक्षा विभाग) व अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संकाय एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने ‘यांत्रिकी अभियांत्रिकी, हरित विनिर्माण एवं ऊर्जा संरक्षण में नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी शब्दावली के अनुप्रयोग’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की।

कार्यक्रम का आरंभ यांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ ओपी उपाध्याय ने किया। कहा कि हमें अपने रोजमर्रा के व्यवहार जैसे हस्ताक्षर आदि में भी हिंदी को शामिल करना पड़ेगा। इससे ही हिंदी का प्रचार-प्रसार होगा। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ टीयू सिद्दीकी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में हिंदी एवं अन्य स्थानीय भाषाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। तकनीकी शिक्षा में हिंदी का शब्दकोश आने से ज्यादा छात्र इससे जुड़ सकेंगे।

विशिष्ठ अतिथि इंजीनियर सुधीर गुप्ता, अध्यक्ष इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, बरेली चैप्टर ने कहा कि हम अपनी शिक्षा किसी भी माध्यम से लें किन्तु हम सबसे पहले हिंदी में ही सोचते हैं। ये अच्छा प्रयास है कि हम स्थानीय भाषा में अपनी शिक्षा भी प्राप्त कर सकेंगे। सहायक निदेशक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के इंजीनयर एमएल मीना ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हिंदी के उपयोग के लिये तेजी से प्रयासरत हैं।

उन्होंने कहा कि किस तरह सरकार लगातार तकनीकी पाठ्यक्रम को तैयार कर रही है और उन्हें शिक्षण संस्थानों में लागू करवा रही है। मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि हम तकनीकी शब्दावली को एप के माध्यम से सब तक पहुंचा सकते हैं। इस प्रकार हम भाषा को तकनीकी शिक्षा के साथ आसानी से जोड़ सकते हैं।

कार्यक्रम में संकायाध्यक्ष प्रो. एसके पांडेय, इंजीनियर सत्यपाल अरोरा, प्रो मुकुल शुक्ला, प्रो उके प्रतिहार एवं प्रो एस मांझी ने हिंदी को तकनीक से जोड़ने के उपाय बताये। इस मौके पर डॉ विशाल सक्सेना, डॉ मनोज कुमार सिंह, आदित्य प्रकाश, मुनेंद्र पाल सिंह, शशिलता, डॉ कौशल सक्सेना, डॉ विनय ऋ षिवाल, डॉ सौरभ मिश्रा, प्रो निवेदिता श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

संबंधित समाचार