राम मंदिर में कथा सुनाने की अभिलाषा है: मोरारी बापू

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अयोध्या। कारसेवकपुरम में संत मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा शनिवार को प्रारंभ हुई। राम कथा का शुभारंभ करते हुए मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को राजा भरत के चरित्र से भक्ति भाव की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इससे पहले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बापू और व्यास पीठ को प्रणाम …

अयोध्या। कारसेवकपुरम में संत मोरारी बापू की नौ दिवसीय रामकथा शनिवार को प्रारंभ हुई। राम कथा का शुभारंभ करते हुए मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को राजा भरत के चरित्र से भक्ति भाव की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इससे पहले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बापू और व्यास पीठ को प्रणाम करते हुए कहा कि राम नगरी में बापू का आगमन और श्रीरामकथा का गायन अयोध्यावासियों के लिये गर्व का विषय है। इस दौरान बापू ने कहा कि अब सिर्फ राम मंदिर में कथा सुनाने की अभिलाषा बची है।

श्री राम कथा शुभारंभ से पहले मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को बताया कि अयोध्या आकर उन्होंने श्रीहनुमान जी , श्रीरामलला और सरयू दर्शन सहित संत महात्माओं के आश्रम में आशीर्वाद लिया। बापू ने अवध में आगमन और कथा गायन का अवसर प्राप्त होने पर अति प्रसन्नता व्यक्त की। कथा प्रारम्भ करते हुए बापू ने कहा अयोध्या में मनोरथ अवश्य पूरा होता है, जीवन में जो निर्णय, श्रीराम की प्रेरणा से और संत के संकल्प से होता है उसे प्रभु अवश्य पूर्ण करते हैं। श्रीभरत जी के यात्रा पथ पर कथा कहने का संकल्प बहुत दिनों का था, अब साकार हो रहा है।

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श्रीरामलला का भव्य मंदिर पूरी दुनिया के लिए सेव्य भी है फिर वो चाहे किसी भी धर्म संप्रदाय के हों। अब तो श्रीरामलला के मंदिर में ही कथा कहने का संकल्प है। विश्व के लिये बहुत बड़ा सगुन है राममंदिर, विश्व में कोई मंगल होने को है, इसी का श्रीगणेश है। श्रीरामलला का मंदिर निर्माण। श्रीराम की भांति ही श्रीराममंदिर भी जरूरी। उन्होंने कहा कि इस बार की कथा का विषय मानस के उत्तरकांड से कागभुसुंडि रामायण के कागभुसुंडि विनय के सात पंक्तियों पर आधारित है। मानस संवाद का शास्त्र है।

यह युग तुलसी का है, मानस का है साधु का है। हम तुलसी युग में जी रहे हैं। मानस का पूर्व पक्ष सत्य है, प्रेम मध्य पक्ष है और करुणा उत्तर पक्ष हैं। यहीं गोस्वामी जी की मानस प्रस्थानत्रयी है। गुरु वंदना से हनुमान जी की वंदना तक प्रथम दिवस की कथा को विश्राम देते हुए बापू ने श्रीराम जन्मभूमि की अयोध्या धाम की और संत समाज की जयकार उद्घोष किया। कथा में बापू के साथ कथा यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं सहित बड़ी संख्या में अयोध्या के संत- महंत सहित अवधवासियों की भारी भीड़ रही।

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