बरेली: मूक बधिरों को कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी में 6 लाख तक की मदद
बरेली, अमृत विचार। अगर आप का बच्चा किसी कारण से बोल या सुन नहीं पाता है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। दोनों ही स्थिति में बच्चों का इलाज कॉकलियर इंप्लांट की सर्जरी से संभव है। सरकार भी इसके लिए योजना चला रही है। इसमें 10 हजार से लेकर 6 लाख रुपये तक की …
बरेली, अमृत विचार। अगर आप का बच्चा किसी कारण से बोल या सुन नहीं पाता है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। दोनों ही स्थिति में बच्चों का इलाज कॉकलियर इंप्लांट की सर्जरी से संभव है। सरकार भी इसके लिए योजना चला रही है। इसमें 10 हजार से लेकर 6 लाख रुपये तक की सरकारी मदद उपलब्ध होगी। जिले के चार बच्चों को इस सर्जरी के लिए चिह्नित किया जा चुका है। आवेदन की कोई समय सीमा फिलहाल निर्धारित नहीं की गई है।
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी योगेश पांडेय ने बताया कि जिले के 0 से 18 वर्ष के ऐसे दिव्यांग जिन्हें चलने में समस्या है। ऐसे बच्चों की करेक्टिव के लिए 10 हजार रुपये, मूकबधिर बच्चों की कॉकलियर इम्प्लान्ट सर्जरी के लिए 6 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है।
ऐसे दिव्यांगजनों के अभिभावकों को सर्जरी कराने के लिए बच्चे का दिव्यांग प्रमाण पत्र, आधार कार्ड एवं फोटो के साथ अपना प्रार्थना पत्र अपने समीप के किसी भी सरकारी, प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केन्द्र, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय व विकास भवन स्थित जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए सरकार ने कोई भी लक्ष्य तय नहीं किया है। कोई भी व्यक्ति इसके लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठाएं।
यह है कॉकलियर इंप्लांट
कॉकलियर इंप्लांट के तहत बच्चों की सर्जरी कर एक मशीन लगायी जाती है। इंप्लांट के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सुनने व बोलने के सेंस को डेवलप करती है। कानों में सेंसर कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने से सुनने में अक्षम रोगियों की सर्जरी कर इसे लगाया जाता है। यह डिवाइस माइक्रोफोन, स्पीच प्रोसेसर, ट्रांसमीटर, रिसीवर और इलेक्ट्रोड से बना होता है। माइक्रोफोन वातावरण से आवाज को स्पीच प्रोसेसर तक और साउंड को फिल्टर कर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिये ट्रांसमीटर तक भेजता है. इस तकनीक का प्रयोग सुनने या बोलने में हो रही परेशानी के बाद डॉक्टर बच्चों को लगाते हैं।
