विश्व एड्स दिवस पर विशेष : जागरूकता और नियमित इलाज से घट रही नये रोगियों की संख्या
(विनोद श्रीवास्तव) मुरादाबाद, अमृत विचार। एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम) गंभीर व भयावह है, लेकिन लाइलाज नहीं है। जागरूकता व नियमित इलाज से एड्स पर अंकुश पाया जा सकता है। इसी फार्मूले पर अमल से जिले में तीन वर्ष में नये एड्स रोगियों की संख्या तेजी से घट रही है। जिले में फिलहाल तीन हजार …
(विनोद श्रीवास्तव) मुरादाबाद, अमृत विचार। एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम) गंभीर व भयावह है, लेकिन लाइलाज नहीं है। जागरूकता व नियमित इलाज से एड्स पर अंकुश पाया जा सकता है। इसी फार्मूले पर अमल से जिले में तीन वर्ष में नये एड्स रोगियों की संख्या तेजी से घट रही है।
जिले में फिलहाल तीन हजार एचआईवी एड्स रोगी हैं। इसमें 2132 की दवा चल रही है। शेष ने बीच में दवा छोड़ दी है। जिन्हें दोबारा इलाज की श्रेणी में लाने के लिए चिकित्साधिकारी, परामर्शदाता और स्वयंसेवी संगठन काम कर रहे हैं। राहत की बात यह है कि तीन वित्तीय वर्ष में जागरूकता उपायों और इलाज में गंभीरता से नये एड्स रोगियों की संख्या लगातार घट रही है।
नजर डालें वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021-22 के 31 अक्टूबर तक के आंकड़े पर तो एक अप्रैल से 31 अक्टूबर तक सिर्फ 231 नये एड्स रोगी चिह्नित हुए हैं। वितीय वर्ष 2020-21 में एड्स रोगियों की संख्या 427 रही। जबकि वर्ष 2019-20 में 632 नये एड्स रोगी जिले में सामने आए थे। आंकड़ों से साफ है कि तीन वित्तीय वर्ष में नये एड्स रोगियों की कम होती संख्या सकून देने वाली है। जिला पुरुष अस्पताल में एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर में एचआईवी एड्स की नि:शुल्क जांच, परामर्श, इलाज और दवा वितरण की सुविधा मिलती है।
एआरटी सेंटर पर मिलने वाली सुविधाएं
परामर्श व समुचित सलाह
विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण व परामर्श नियमित रक्त परीक्षण व सीडी-4 की जांच एचआईवी के बारे में जानकारी एंटी रेट्रो वायरल दवाओं का वितरण कंडोम का मुफ्त वितरण अवसरवादी संक्रमण का निदान व उपचार
एड्स फैलने के कारण
एचआईवी संक्रमित के साथ
असुरक्षित यौन संबंध एचआईवी संक्रमित सुईं व सीरिंज के साझा प्रयोग से एचआईवी संक्रमित रक्त या उत्पाद के चढ़ाने से संक्रमित मां से गर्भस्थ शिशु में
कंट्रोल नंबर पर करें संपर्क
जानकारी ही बचाव स्लोगन को साकार करने के लिए एड्स रोग की अधिक जानकारी व इलाज में सहयोग के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-2500 और 1097 पर संपर्क किया जा सकता है।
बचाव के उपाय
कंडोम का सही तरीके से हर बार प्रयोग करें हमेशा नई सुईं व सीरिंज का प्रयोग करें हमेशा लाइसेंस शुदा ब्लड बैंक से एचआईवी मुक्त रक्त लेकर मरीज को चढ़वाएं हर गर्भवती मां की एचआईवी जांच व संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करें
एड्स नियंत्रण में सहयोग कर रहे स्वयंसेवी संगठन
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (यूपीएसएसीएस) के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग के साथ स्वयंसेवी संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है। एड्स नियंत्रण के लिए जागरूकता के तो स्वयंसेवी संगठन उपाय करते ही हैं। वह मरीजों के साथ सामाजिक स्तर पर भेदभाव न हो इसके लिए भी प्रेरित करते हैं। एड्स पीड़ित ऐसे मरीजों को वह केंद्र तक पहुंचाने का काम करते हैं जो किसी संकोच या झिझक के चलते इलाज से दूर हैं या बीच में भी दवा छोड़ चुके हैं। इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने में जिले में विहान, कार्तिक, नवभारत, वाईआरजी, शरणम आदि संस्थाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
जागरूकता और नियमित दवा के सेवन से एड्स नियंत्रण संभव है। तीन वर्ष से नये एड्स रोगियों की संख्या में कमी आई है। बीमारी से बचने के लिए एहतियात प्रमुख है। नादानी में पड़कर खुद का जीवन जोखिम में न डालें। अपने परिवार और समाज को भी एड्स मुक्त रखने में जिम्मेदारी निभाएं। डॉ. मोहिसन, वरिष्ठ परामर्शदाता, एआरटी सेंटर, जिला अस्पताल
