मारपीट करने वाले वकीलों के खिलाफ हाईकोर्ट सख्त

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लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने दीवानी मुकदमा दायर करने वाले वकील को धमकी देकर मारपीट करने के आरोप के वकीलो के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में पुलिस उपायुक्त पश्चिमी ने सोमवार को हाईकोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने इसे रिकार्ड पर लेकर अगली सुनवाई मंगलवार को नियत …

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने दीवानी मुकदमा दायर करने वाले वकील को धमकी देकर मारपीट करने के आरोप के वकीलो के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में पुलिस उपायुक्त पश्चिमी ने सोमवार को हाईकोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने इसे रिकार्ड पर लेकर अगली सुनवाई मंगलवार को नियत की है। साथ ही डीसीपी सोमेन वर्मा समेत पेश हुए अन्य पुलिस अफसरों को भी 14 दिसंबर को फ़िर पेश होने को कहा है।

उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी श्रीवास्तव व पक्षकारों के वकील पेश हुए। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने डीसीपी पश्चिमी को निर्देश दिया था कि इस घटना में शामिल लोगों की पहचान करें। इसके लिए कोर्ट मे उन्हें सीसीटीवी फुटेज व याचिका के कथन की मदद लेने की छूट दी थी। अदालत ने जिला जज समेत लखनऊ बार एसोसिएशन व सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को निर्देश दिया था कि आरोपियों की पहचान करने में डीसीपी पश्चिमी की पूरी मदद करें। साथ ही डीसीपी से घटना की विस्तृत रिपोर्ट 13 दिसंबर को तलब की थी।

न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता चन्द्र शेखर यादव की याचिका पर दिया। याची का कहना था उसने सिविल कोर्ट में एक दावा दायर किया था। इसमें प्रतिवादी की तरफ से दो वकीलों ने बगैर पता दिए व बिना मोबाईल नंबर के वकालतनामा दाखिल किया। साथ याची को दावे में पैरवी करने पर गम्भीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। याची का यह भी आरोप है कि गत एक नवंबर को इन्हीं दोनों वकीलों ने 50-60 अज्ञात लोगों के साथ आकर याची के साथ के वकीलों व उसके साथ एक मुंशी को सिविल जज एफटीसी सीनियर डिविजन लखनऊ की अदालत में जाने से रोका व हाथापाई की। याची ने इस घटना की प्राथमिकी वजीर गंज थाने में दर्ज कराई थी।

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याचिका में घटना की जांच समेत जिला कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम किए जाने की गुजारिश की है। याची का कहना था कि एक माह बाद भी इस मामले ती तफ्तीश शुरु नहीं हुई। कोर्ट ने कहा था कि अपने तरह का यह पहला केस नहीं है। बल्कि एक और मामला हिंसा व वकीलों के गैर व्यावसयिक आचरण से संबंधित है। ऐसे मामलों में विवेचना न होना स्वीकार्य नहीं है। हिंसा संबंधी शिकायतों व न्याय देने में बाधा की घटनाओं की समुचित व समय से विवेचना कर जल्द गौर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के समय पेश हुए डीसीपी पश्चिम जोन समेत वजीर गंज थाने के एसएचओ राज किशोर पांडेय व विवेचक बृजेश दुबे को फिर 14 दिसंबर को अगली सुनवाई पर तलब किया है।

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