मुरादाबाद : 100 रुपये में निगम ने बेची वीवीआईपी सड़क, कांठ रोड पर ठेला लगाने वालों से वसूली करते हैं निगमकर्मी

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आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। अगर प्रशासन के सर्किल रेट की बात करें तो उससे भी महंगी है सिविल लाइंस क्षेत्र की धरती। यहां पांच गज की कीमत है 100 रुपये। यह भी हर दिन के हिसाब से। यानी की 3000 हजार रुपये में महीने भर दुकान की छूट। पैसा चुकाने पर नगर निगम की टीम …

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। अगर प्रशासन के सर्किल रेट की बात करें तो उससे भी महंगी है सिविल लाइंस क्षेत्र की धरती। यहां पांच गज की कीमत है 100 रुपये। यह भी हर दिन के हिसाब से। यानी की 3000 हजार रुपये में महीने भर दुकान की छूट। पैसा चुकाने पर नगर निगम की टीम और यातायात पुलिस की नजरें इनायत रहती हैं। जिलाधिकारी, एडीजी पुलिस एकेडमी और अन्य अधिकारियों के आवास के सामने खरीदार भी अच्छे मिलते हैं।

मजेदार तो यह कि यहां जमीन की बोली हर दिन लगती है। कीमत पहले चुकानी पड़ती है। 100 रुपये में पांच गज जमीन पर मालिकाना हक रहता है। समय-समय पर 10 से 20 गज आगे-पीछे ठेला घुमाने की छूट रहती है। अतिक्रमण और जाम से शहर को राहत दिलाने वाले कर्मचारी ही इस मुसीबत की जड़ हैं। जिलाधिकारी आवास के इर्द-गिर्द नो वेंडिंग जोन का बोर्ड लगा है। लेकिन यहां डंके की चोट पर फलों की दुकानें सजती हैं।

सुंदर और विविधता वाले फल भला किसको न अपनी ओर आकर्षित कर दें। शाम को घरों की ओर लौटते लोग बरबस सड़क पर आड़े-तिरछे गाड़ी खड़ी कर फल पसंद करने लगते हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने नगर निगम की बैठक में इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर की थी। तब उन्होंने नगर निगम के 10 निरीक्षकों को नोटिस तक जारी कराया था। विभागीय जांच में इस आरोप की पुष्टि हुई थी। सूत्रों की मानें तो कांठ रोड पर ठेला लगाने वाले फल विक्रेता रोजाना इसकी कीमत चुकाते हैं। यानी कि पांच गज जमीन के लिए 100 रुपये का रेट अभी भी बरकरार है। तस्वीरें और विक्रेताओं की बात इसकी गवाही है। आप जब चाहे कांठ रोड के नो-वेडिंग जोन का ऐसा नजारा देख सकते हैं।

हम कई बार चालान भुगत चुके
सोनू पुत्र महेंद्र निवासी पीतलनगरी। पिता-पुत्र दोनों फल बेचते हैं। बकौल सोनू, हम सुबह ठेला लेकर निकल जाते हैं। पीलीकोठी सिविल लाइंस, कांठ रोड होते घर लौट जाते हैं। यहां बिक्री सही हो जाती है। लेकिन, डेढ़ महीने पहले नगर निगम की टीम ने ठेला चालान कर दिया था। 150 रुपये जुर्माना लगा था। असालतपुरा के अब्दुल रहीम का कहना है कि डीएम आवास क्षेत्र में पुलिस भगाती है। हमें कभी नगर निगम की टीम ने परेशान नहीं किया। लेकिन, शाम को कभी-कभी सड़क पर जाम लग जाता है।

फल के कारोबारी दानिश कुरैशी का ठेला चलाने वाले अमान कहते हैं कि जब निगम के कर्मचारी यहां पर आते हैं तो उनकी सेवा कर दी जाती है। कमाई में कुछ खर्च करने में बुराई क्या है। बड़ा हाता असालतपुरा के मकरुद्दीन पहले ऐसे सवालों पर टाल मटोल करते हैं। कुरेदने पर कहते हैं कि हम तो सालों से यहां ठेला लगाते हैं। इसके लिए कभी पुलिस को तो कभी नगर निगम की टीम को ईनाम दे देते हैं। रोजाना ठेला लगाने वाले हर दिन के लिए 100 जगह का किराया देने की बात बताते हैं। नाम के सवाल पर रोजी का हवाला लेकर शांत हो जाते हैं।

अपर नगर अयुक्तअनिल कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश भर में स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित किया जा रहा है। कालोनियों और प्रमुख स्थानों पर जाम को लेकर विभाग की टीम जिम्मेदार है। ऐसे में अगर सिविल लाइंस, जिलाधिकारी आवास और मुख्य जगहों पर ठेला और खोमचे लग रहे हैं तो यह गलत है। निरीक्षकों की टीम भेजकर इस स्थिति की छानबीन करायी जाएगी।

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