मुरादाबाद : मां-बाप के झगड़ों में छिन रहा बच्चों से बचपन, भरण-पोषण के 956 मामले दर्ज

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, मुरादाबाद। ममता के जिस आंचल में खेलकर बच्चा बड़ा होता है, पिता की अंगुली पकड़कर चलता है और भविष्य संवारता है। वर्तमान में वह सब खत्म होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है पति-पत्नी के बीच बढ़ते अवसाद का। जिसके कारण बच्चों से उनके हिस्से की छांव छीन रही है। बच्चों …

अमृत विचार, मुरादाबाद। ममता के जिस आंचल में खेलकर बच्चा बड़ा होता है, पिता की अंगुली पकड़कर चलता है और भविष्य संवारता है। वर्तमान में वह सब खत्म होता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है पति-पत्नी के बीच बढ़ते अवसाद का। जिसके कारण बच्चों से उनके हिस्से की छांव छीन रही है।

बच्चों को दोनों का प्यार मिल मिलता। कोई पिता के साथ ले रही बिलख रहा है तो किसी को अपनी मां का इंतजार है। परिवार न्यायालय में परिवार विवादों के मामलों में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। इस वर्ष 956 मामले भरण पोषण और गार्जियंस एंड वाड् र्स एक्ट में 22 मामले है। इसके अलावा 503 मामलों में वारंट जारी किया गया है।

क्या कहते है विज्ञानी…
हिन्दू कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रो. डा. मीनू महरोत्रा बताती हैं कि सिंगल पैरेंट वाले बच्चे की मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है। मम्मी-पापा को अलग होता देख बच्चा सहम जाता है। विवाद देखकर बच्चे लंबे समय के लिए अवसाद में चले जाते है। उनकी रचनात्मकता खत्म हो जाती है। ये तनाव किसी बुरी आदत या बीमारी का रुप ले लेता है।

बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों का प्यार अहम है। भारतीय परिवारों की परिकल्पना तभी पूर्ण होती है, जब बच्चे को माता-पिता का संयुक्त स्नेह मिले। माता-पिता के तलाक, संबंध विच्छेद और विवाद के कारण यह संभव नहीं होता। इससे बच्चे के साथ समाज पर ही असर पड़ता है।

केस-1
दस साल का (काल्पनिक नाम) सोहिल दो साल से स्कूल नहीं जा पाया है। क्योंकि उसकी अम्मी- अब्बा का तलाक हो गया है। ऐसे में सोहिल दोनों के झगड़े में पिस गया है। एम महीने वह अपनी अब्बा के घर रहता है और एक महीने सोहिल अम्मी के पास रहता है। अम्मी के पास दाखिल के लिए पैसे नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही बाधित हो गई है।

केस-2
15 साल की रश्मी (काल्पनिक नाम) तीन साल से अपनी नानी के घर रह रही है क्योंकि उसके माता-पिता झगड़े के कारण अलग हो गए है। ऐसे में महिला नौकरी के काम में व्यस्त रहती है बच्ची की देखरेख के लिए कोई नहीं होने के कारण महिला ने उसे अपने मायके में छोड़ दिया है बच्ची अपने पिता को याद करके आज भी रोती है।

वर्ष भरण पोषण गार्जियंस एंड वाड् र्स एक्ट
2021 900 16
2020 897 17
2021 956 22

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