यूपी में जड़ें जमाने का सपना देखना छोड़ें ओवैसी: इंद्रेश कुमार
इटावा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ इंद्रेश कुमार ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद के बाहर वजूदहीन है और उत्तर प्रदेश में जड़े जमाने का उनका ख्वाब कभी पूरा नहीं होगा। अमृत महोत्सव के तहत इटावा क्लब सूफी संत मलंग समाज के सम्मेलन को संबोधित करते …
इटावा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ इंद्रेश कुमार ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद के बाहर वजूदहीन है और उत्तर प्रदेश में जड़े जमाने का उनका ख्वाब कभी पूरा नहीं होगा।
अमृत महोत्सव के तहत इटावा क्लब सूफी संत मलंग समाज के सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद के बाहर वजूदहीन है लेकिन यूपी में ताकतवर बनने की कोशिश कर रहे हैं। वह पहले हैदराबाद में तो सरकार बना लें, यूपी वालों को दुखी क्यों करते हैं। देश में सब जगह चुनाव मैदान में उतरने पर ओवैसी की जमानत जब्त होती है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के बंटवारे के जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का महिमा मंडन कर मुसलमानों के वोट की ओर देख रहे हैं।
जिसने मुल्क बांटा, उसके नाम पर क्या देश के मुसलमान उसके सहयोगी बनेंगे। पाकिस्तान ने आज तक एक करोड़ 40 लाख मुसलमानों को नागरिकता नहीं दी है तो ऐसे में उस देश के संस्थापक का नाम लेने वाले का साथ मुसलमान कतई नहीं देंगे। लोगों को जाली वाली नकली टोपी और लाल टोपी वालों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में जुल्म हो हुए तो सब ने उसकी निंदा की है।
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बालघाट, लखीमपुर या कश्मीर में हिंसा हुई तो उसकी भी सभी लोगों ने निंदा की और जिन्होंने उस हिंसा पर चुप्पी सादी वह अपराधी हैं। डॉ कुमार ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर भारत अपना दावा करता रहा है। पड़ोसी देश को समझना होगा कि यह दावा यह खुली चुनौती भारत के हर एक दल की है। पार्लियामेंट में सब ने मिलकर इस बात को कहा तो इसलिए सोचने की जरूरत नहीं है। सूफी संत मलंग समाज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से इटावा क्लब में अमृत महोत्सव के अंतर्गत आजादी के 75वीं सालगिरह के उपलक्ष में हुब्बुल वतनी पैग़ाम-ए-अमन कौमी एकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध सभी धर्मों के धर्मगुरु मंच पर मौजूद रहे।
