प्रयागराज: माघ मेला के लिए मंडलायुक्त ने किया गंगा पूजन…
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त सलिला स्वरूप में प्रवाहित होती सरस्वती के तट पर त्याग, तपस्या और वैराग्य के प्रतीक माघ मेले की कुशलता के लिए अधिकारियों और साधु संतों ने गुरुवार को गंगा मइया को दुग्धाभिषेक कर विधि-विधान से पूजन अर्चन किया। पुरोहितों ने …
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त सलिला स्वरूप में प्रवाहित होती सरस्वती के तट पर त्याग, तपस्या और वैराग्य के प्रतीक माघ मेले की कुशलता के लिए अधिकारियों और साधु संतों ने गुरुवार को गंगा मइया को दुग्धाभिषेक कर विधि-विधान से पूजन अर्चन किया।
पुरोहितों ने गंगा पूजन कर हर साल संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले के सकुशल संपन्न होने की कामना की। गंगा पूजन के साथ माघ मेले की आरंभ की परंपरा है। उसी परंपरा को निभाते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से गंगा पूजन किया गया। इस अवसर पर मण्डलायुक्त संजय गोयल, जिलाधिकारी संजय खत्री, पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, मेला अधिकारी शेषमणि पाण्डेय समेत बड़ी संख्या में साधु संत उपस्थित थे।
गोयल ने कहा कि पिछले साल की तरह ही इस बार भी मेले की तैयारी की जा रही है। मेले को पांच सेक्टर में बसाया जा रहा है। गंगा और यमुना नदी में पानी छोड़े जाने से तैयारियों में बिलंब हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि तय समय में सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
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साथ ही कोविड जांच की व्यवस्था भी मेला क्षेत्र में रहेगी। उन्होंने मेले में आले में आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं से अपील किया है कि कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लेकर ही मेला क्षेत्र में आएं। वहीं, पहला स्नान 14 जनवरी मकर संक्रांति, दूसरा स्नान 17 जनवरी पौष पर्णिमा, तीसरा स्नान एक फरवरी मौनी अमावस्या, चौथा स्नान पांच फरवरी बसंत पंचमी व पांचवा 16 फरवरी माघी पूर्णिमा और छठवां और अंतिम स्नान एक मार्च को महाशिवरात्रि पर्व के साथ मेले का भी समापन होगा।
