मुरादाबाद : अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर संसाधनों का ग्रहण, दो करोड़ की लागत से बनी प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट को संचालन का इंतजार

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मुरादाबाद, अमृत विचार। उच्चीकृत व अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर संसाधनों का ग्रहण लगा है। जिला अस्पताल परिसर में दो करोड़ रुपये की लागत से बने प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट को अभी संचालन का इंतजार है। जबकि मुख्यमंत्री ने इस भवन का लोकार्पण भी कर दिया है। लेकिन साल 2021 बीतने में महज 14 दिन …

मुरादाबाद, अमृत विचार। उच्चीकृत व अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर संसाधनों का ग्रहण लगा है। जिला अस्पताल परिसर में दो करोड़ रुपये की लागत से बने प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट को अभी संचालन का इंतजार है। जबकि मुख्यमंत्री ने इस भवन का लोकार्पण भी कर दिया है। लेकिन साल 2021 बीतने में महज 14 दिन शेष है। यह सौगात मरीजों के लिए छलावा ही साबित होकर रह गया।

प्रदेश सरकार ने जिला व मंडल मुख्यालयों पर स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतरी के लिए कदम तो उठाया, लेकिन यह मुकाम तक नहीं पहुंचा। इसमें संसाधनों का ग्रहण लग गया। मुरादाबाद मंडल मुख्यालय पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय जिला पुरुष अस्पताल में भी यही रोना है। इस अस्पताल में ज्वलनशील पदार्थों से जलने से पीड़ित मरीजों के बेहतर इलाज और विकृत चेहरे और शरीर को अच्छा लुक देने के लिए करीब दो करोड़ की लागत से प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट स्थापित किया गया।

भवन बनकर तैयार हुआ तो आनन फानन में इस वर्ष 15 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों इसका लोकार्पण भी हो गया। इसके साक्षी बने प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी और जिले के प्रभारी व जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह। लेकिन, हैरत यह कि लोकार्पण के दस महीने बीतने के बाद भी यूनिट क्रियाशील नहीं हो पाई। वजह इस यूनिट में न तो अब तक सर्जन की तैनाती हुई और न 24 घंटे के लिए तीन शिफ्ट में स्टाफ की। इसके चलते आज भी बर्न के मरीजों को इमरजेंसी में छह बेड के बर्न वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। जबकि इस भवन में कोविड संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण के उपयोग में लिया जा रहा है। लेकिन, मरीजों को इस यूनिट का लाभ मिलने का इंतजार है।

जिला पुरुष अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. शिव सिंह ने बताया कि प्लास्टिक सर्जन व अन्य स्टाफ की तैनाती शासन स्तर से होनी है। इसकी डिमांड यूनिट के प्रस्ताव के समय ही की गई थी। 199 लाख की लागत से यूनिट के लिए भवन बना, लोकार्पण भी हो गया। लेकिन स्टाफ न होने से संचालन नहीं हो पा रहा है।

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