बरेली: आरईडी के रजिस्टर में पकड़ा गया फर्जी हाजिरी का खेल
बरेली, अमृत विचार। विकास भवन में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) का स्टाफ लंबे समय से फर्जी हाजिरी लगाकर पूरी तनख्वाह लेता रहा जब शिकायत अफसरों तक पहुंची और सीडीओ ने इसको गंभीरता से संज्ञान में लेकर जब औचक जांच कराई तो खेल पकड़ा गया। जांच में हाजिरी रजिस्टर में कई कर्मचारी उपस्थित मिले, लेकिन मौके …
बरेली, अमृत विचार। विकास भवन में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) का स्टाफ लंबे समय से फर्जी हाजिरी लगाकर पूरी तनख्वाह लेता रहा जब शिकायत अफसरों तक पहुंची और सीडीओ ने इसको गंभीरता से संज्ञान में लेकर जब औचक जांच कराई तो खेल पकड़ा गया। जांच में हाजिरी रजिस्टर में कई कर्मचारी उपस्थित मिले, लेकिन मौके पर अनुपस्थित थे।
साथी कर्मचारियों ने इनको बचाने के कई बहाने बनाए, लेकिन इस मामले में सीडीओ कार्रवाई करेंगे। तीन कर्मचारियों का वेतन काटने के साथ ही स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बताया जा रहा है कि कई लिपिक एक हफ्ते तो कई महीनों गायब रहते हैं, लेकिन इनकी उपस्थिति नियमित तरीके से लगती रहती है। रजिस्टर की जांच में दो लिपिक की उपस्थिति मिली लेकिन वह अनपुस्थित थे। एक अन्य कर्मी का हाजिरी रजिस्टर में नाम नहीं था। जबकि, वह मौके पर मिला। इस पर तीन कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।
एक्सईएन बैठते नहीं, साथी कर्मचारी करते हैं हस्ताक्षर
-दरअसल, आरईडी विभाग के एक्सईएन के पास बरेली का अतिरिक्त चार्ज है। पीलीभीत समेत दो अन्य जिलों की जिम्मेदारी भी वह संभाल रहे हैं। निरीक्षण के दौरान जानकारी चाही तो पता चला कि अनपस्थित कर्मचारी तो कई दिन तक बिना किसी सूचना के गायब रहते हैं। इनकी हाजिरी साथी कर्मचारी बड़े हिसाब से लगाते हैं। जिस दिन एक्सईएन के आने की भनक लगती है तो वह आ जाते हैं। सीडीओ के स्टेनो विकास कुमार जैसे ही रजिस्टर लेकर कार्यालय पहुंचे तो खलबली मच गई।
एक-एक कर्मचारियों का नाम बोलते हुए उनकी उपस्थिति जानी तो चार से पांच कर्मी अनुपस्थित मिले। इस पर दो कर्मियों को लेकर बताया गया कि वह अभी-अभी डाक लेकर निकले हैं। अन्य दो कर्मचारियों को लेकर दवाई लेने जाने आदि का बहाना बनाया गया, लेकिन एक नहीं चली।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में बगैर उपस्थिति के हाजिरी बनाने के मामले की जांच कराई जा रही है। यह मामला बेहद गंभीर है। इसके लिए संबंधित जिम्मेदार के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। —चंद्र मोहन गर्ग, सीडीओ
