मुरादाबाद : लाखों रुपये खर्च फिर भी एक छत के नीचे नहीं मिल रहीं सुविधाएं

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। नगर निगम की तंग इमारत में अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए भटकने वाले महानगर वासियों को वर्ष 2021 में भी राहत नहीं मिल सकी। लाखों खर्च होने के बाद भी उनको एक छत के नीचे टैक्स, सफाई और पेयजल की समस्याओं से निजात नहीं मिल पा रही है। जिसकी वजह है कि …

मुरादाबाद,अमृत विचार। नगर निगम की तंग इमारत में अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए भटकने वाले महानगर वासियों को वर्ष 2021 में भी राहत नहीं मिल सकी। लाखों खर्च होने के बाद भी उनको एक छत के नीचे टैक्स, सफाई और पेयजल की समस्याओं से निजात नहीं मिल पा रही है। जिसकी वजह है कि अभी तक एकल विंडो की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जिस कारण महानगर वासी फार्म व बिल जमा करने के साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए भटकने को मजबूर हैं।

टाउनहाल स्थित नगर निगम कार्यालय का भवन दशकों पुराना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार करीब 100 साल पुराने भवन में कार्यालय संचालित किया जा रहा है। विभाग और स्टाफ बढ़ने के कारण यह भवन अब छोटा पड़ रहा है। कई अधिकारियों के कार्यालय अब पीलीकोठी स्थित नगर आयुक्त के कैंप कार्यालय में शिफ्ट कर दिए गए हैं। जिस कारण निगम आने वाले फरियादियों को अधिकारियों से मिलने में परेशानी होती है।

फरियादियों को सुविधा देने के लिए मंजूर हुआ था प्रस्ताव : महानगर वासियों की इस समस्या को कई बार पार्षदों ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने एकल विंडो के साथ ही बैठक के लिए नए सभागार की मांग उठाई थी। नवंबर 2020 में बोर्ड की बैठक में दोनों प्रस्ताव मंजूर कर लिए गए थे। एकल विंडों के लिए 10 लाख का बजट मंजूर हुआ था।

योजना थी कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, टैक्स, सफाई और पेयजल के अलावा अन्य समस्याओं से संबंधित प्रार्थना पत्र विंडों पर दिए जाएंगे। इसके बाद निस्तारण के लिए वह संबंधित अधिकारी के पास भेज दिए जाएंगे। खासतौर पर सफाई व पेयजल की समस्या का समाधान उसी दिन करने के निर्देश दिए गए थे। जबकि बिल व फार्म यहीं पर जमा करने के बाद उनकी रसीद दे दी जाएगी। बजट मंजूर होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया।

फरियादियों के बैठने के लिए बेंच भी बनवा दी गईं। बारिश व धूप से बचने के लिए टीन शेड भी पड़ा। अब बात करें हकीकत की तो तमाम दावों के बाद भी एकल विंडों चालू नहीं हो सकी। जिस कारण फरियादियों को अभी भी भटकना पड़ रहा है। जबकि जुलाई में वातानुकूलित सभागार तैयार हो चुका है।

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