चुनाव आयोग तय नहीं करेंगा की कौन है कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का सदस्य : अंशू अवस्थी

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लखनऊ। विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। यहां तक तो ठीक है लेकिन, अगर चुनाव आयोग भी निशाने पर आ जाए तो? ताजा मामला कांग्रेस पार्टी से संबंधित है। गुरुवार को एक सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र ने कहा कि, कांग्रेस की सूची में …

लखनऊ। विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। यहां तक तो ठीक है लेकिन, अगर चुनाव आयोग भी निशाने पर आ जाए तो? ताजा मामला कांग्रेस पार्टी से संबंधित है। गुरुवार को एक सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र ने कहा कि, कांग्रेस की सूची में जिन लोगों के नाम शामिल है वो उन्हीं को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का सदस्य बनाएंगे और उन्हीं से मुलाकात करेंगे। इस पर पार्टी प्रवक्ता अंशू अवस्थी का कहना है कि, चुनाव आयोग तय नहीं करेगा की कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य कौन हैं। चुनाव आयोग को प्रतिनिधिमंडल के नामों की सूचनी भेजी गई है।

दरअसल, मंगलवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में ओमकार नाथ सिंह, वीरेंद्र मदान व अनस खान आदि मौजूद थे। उन्होंने आयोग से आगामी विधानसभा चुनाव को उप्र पुलिस की जगह केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में कराने की मांग की थी। साथ ही सवाल उठाते हुए उन्होंने शासन एवं पुलिस की निष्पक्षता पर लगातार प्रश्न चिन्ह उठा था।

इस मुलाकात के दो दिन बाद गुरुवार को अमेठी से वापस लौट प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में जब कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने दोबारा चुनाव आयोग से मुलाकात करनी चाहती तो उनको समय नहीं मिला। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग को लिखित पत्र भेजकर अपने सुझाव दिए। इसको लेकर पूर्व राज्य सभा सदस्य पीएल पुनिया, पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी व नेता विधानमंडल दल अराधना मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस भी की। आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि वर्तमान समय में कोविड महामारी की तीसरी लहर की आशंका है। जिसमें छोटी सभाओं, चौपाल, वर्चुअल मीटिंग और डोर टू डोर कैंपेन जैसी आयोजन किये जाने चाहिए एवं बड़ी रैलियों पर रोक लगानी जानी चाहिए।

अपराधियों को सरकार का संरक्षण : पुनिया

पूर्व सांसद पीएल पुनिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि, आरएसएस की दलित और महिला विरोधी सोच है। उसकी नीतियों के चलते देश में सबसे ज्यादा योगी सरकार में दलितों और महिलाओं के साथ हिंसक घंटनाएं हुई हैं। इसका सीधा कारण अपराधियों को सरकार का संरक्षण मिलना और उन्हें बचाना है। जिससे प्रदेश में दलितों के खिलाफ औसतन 34 अपराध की घटनाएं रोजाना हो रही हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि, भाजपा की प्रदेश सरकार पूरे पांच साल पीड़ितों को धमकाकर, अपराधियों को बचाती रही और घटनाओं पर पर्दा डालती रही। अमेठी की घटना भी उसी का दुष्परिणाम है। मुख्यमंत्री योगी की प्रशासनिक अक्षमता और झूठे दावों के चलते अपराधियों में कानून का डर खत्म हो गया।

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