बरेली: करोड़ों की रिश्वत खिला अवैध रूप से बनाया व्यावसायिक भवन
बरेली, अमृत विचार। करोड़ों रुपये की रिश्वत खिलाकर सिविल लाइंस क्षेत्र में आवासीय भूमि पर तीन मंजिला व्यावसायिक भवन बनवाने का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा है। इसमें बरेली विकास प्राधिकरण के अफसरों पर कथित तौर पर रिश्वत लेकर अवैध रूप से भवन बनवाने का आरोप लगाया गया है। लखनऊ की निवासी मोहिनी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री …
बरेली, अमृत विचार। करोड़ों रुपये की रिश्वत खिलाकर सिविल लाइंस क्षेत्र में आवासीय भूमि पर तीन मंजिला व्यावसायिक भवन बनवाने का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा है। इसमें बरेली विकास प्राधिकरण के अफसरों पर कथित तौर पर रिश्वत लेकर अवैध रूप से भवन बनवाने का आरोप लगाया गया है। लखनऊ की निवासी मोहिनी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री से शिकायत करने के मामले को मुख्यमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया है।
इसमें जिलाधिकारी को चिट्टी भेजकर कहा गया है कि बीडीए में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराएं। शिकायत की जांच किसी अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी से कराकर प्रकरण की आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी आरएन सिंह की चिट्ठी मिलने के बाद जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कथित भ्रष्टाचार के प्रकरण में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। जांच कमेटी में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संतोष बहादुर सिंह, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम प्रदीप रमन और बीडीए के अधिशासी अभियंता को शामिल किया है। डीएम ने कमेटी को संयुक्त जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
एक तल का नक्शा बीडीए से पास, निर्माण तीन तल का किया
लखनऊ के महानगर एक्सटेंशन, जे पार्क-बी 54 निवासी मोहिनी सिंह ने मुख्यमंत्री से 13 दिसंबर को शिकायत की। जिसमें कहा गया है कि एक भू-माफिया ने बीडीए के अफसरों को रिश्वत खिलाकर अवैध रूप से तीन मंजिला भवन बनवाया है। गांधी उद्यान से चौकी चौराहा जाने वाली सड़क पर यह भवन बनाया गया है।
भूमि आवासीय में दर्ज है। व्यावसायिक भवन बनाकर दुकानें भी आवंटित कर दी हैं। यह भी बताया कि बीडीए ने सिर्फ एक तल का नक्शा पास किया है। जबकि निर्माण तीन तलों का किया गया है। कई फर्जी कंपनियां खोलने की भी शिकायत की। मोहिनी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रकरण की जांच बीडीए के किसी भी अधिकारी से न कराई जाए। जांच प्रभावित होने का शक जताया। जांच जिलाधिकारी या उनके अधीन तैनात किसी मजिस्ट्रेट से कराने की मांग की थी।
तीन माह पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी हुई थी शिकायत
मोहिनी सिंह ने तीन माह पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत करते हुए प्रकरण में जांच कराने की मांग उठाई थी। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जांच जिला स्तर पर आई लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और प्रकरण की जांच लंबित हो गई।
